‘कुछ चीजों के लिए ‘ना’ कहना जरूरी’, चित्रांगदा सिंह ने करियर में मना करने की अहमियत पर दिया जोर
Chitrangada Singh ने एक इंटरव्यू में बताया कि करियर में 'ना' कहना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खराब काम करने से विश्वसनीयता कम होती है, इसलिए खराब प्रोजेक्ट्स को मना करना उनकी इमेज को बचाए रखता है।
- Written By: अनिल सिंह
Chitrangada Singh (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Chitrangada Singh Career Advice: फिल्म इंडस्ट्री में सही प्रोजेक्ट चुनना किसी भी कलाकार के करियर के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला होता है। इसी विषय पर अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने आईएएनएस से खुलकर बात की और बताया कि अपने करियर के दौरान ‘ना’ (No) कहना सीखना उनके लिए सबसे अहम सीखों में से एक रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक कलाकार के रूप में अपनी छवि और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए कुछ खराब प्रोजेक्ट्स को मना करना क्यों जरूरी हो जाता है।
‘ना’ कहकर बचाई अपनी छवि
चित्रांगदा सिंह ने बताया कि खराब काम को स्वीकार करना कलाकार की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
पहचान की सुरक्षा: उन्होंने कहा, “अगर कोई कलाकार बार-बार खराब काम करता है, तो उसकी पहचान और विश्वसनीयता धीरे-धीरे कम हो जाती है। ऐसे में कुछ चीजों के लिए ‘ना’ कहना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह एक अभिनेता के रूप में आपकी इमेज को बचाए रख सकता है।”
आत्मसंतोष: बॉलीवुड एक्ट्रेस ने यह भी स्वीकार किया कि हर बार मना किया गया फैसला सही नहीं होता, लेकिन कई बार ऐसे फैसले लिए गए हैं जिनका उन्हें आज तक कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, “ऐसे फैसलों ने मुझे आत्मसंतोष दिया और करियर को एक सटीक दिशा दी।”
ये भी पढ़ें- ‘सपने मरते नहीं…’, मिस दीवा सुपरनेशनल 2025 का ताज जीतने पर बोलीं अवनि गुप्ता
सिर्फ अभिनेता नहीं, पूरी टीम का योगदान
चित्रांगदा सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी अभिनेता के स्टारडम में पूरी टीम की बड़ी भूमिका होती है।
टीम वर्क का महत्व: उन्होंने कहा, “आखिरकार फिल्म सिर्फ एक अभिनेता से नहीं बनती, बल्कि निर्देशक, लेखक, एडिटर और पूरी क्रिएटिव टीम मिलकर उसे आकार देती है।” उन्होंने बताया कि निर्देशक का नजरिया, किरदार को दिखाने का तरीका, और एडिटिंग टेबल पर लिए गए फैसले— ये सभी चीजें किसी अभिनेता के प्रदर्शन को निखारने में मदद करते हैं।
टीम की सोच ज्यादा मायने रखती है
गुणवत्ता प्राथमिकता: उन्होंने कहा कि अच्छे फिल्मकारों के साथ काम करने से अभिनेता खुद-ब-खुद बेहतर बनता जाता है। इसी कारण उनके लिए सिर्फ स्क्रीन टाइम नहीं, बल्कि फिल्म की गुणवत्ता और टीम की सोच ज्यादा मायने रखती है।
