Chandrashekhar Vaidya Birthday:13 साल में दूल्हा बने, 7वीं के बाद छूटी पढ़ाई, ‘रामायण’ ने बदली किस्मत
Chandrashekhar Vaidya Biography: दूरदर्शन की 'रामायण' में सुमंत का रोल निभाने वाले दिग्गज एक्टर चंद्रशेखर वैद्य के जीवन का सफर संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत और प्रेरणादायक मिसाल है।
- Written By: यति सिंह
दिवंगत चंद्रशेखर वैद्य (फाइल फोटो)
Chandrashekhar Vaidya Birthday Special: रामानंद सागर की ‘रामायण’ का प्रसारण जब दूरदर्शन पर होता था, तब देश की सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। लोग अपने टीवी के सामने हाथ जोड़कर बैठ जाते थे। इस ऐतिहासिक शो ने हर कलाकार को घर-घर में पूजनीय बना दिया था। भगवान राम के सारथी और राजा दशरथ के परम मित्र ‘आर्य सुमंत’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता चंद्रशेखर वैद्य ने जब परदे पर यह रोल जिया, तब उनकी उम्र 64 वर्ष थी।
बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जीवन में कितना लंबा और कठिन संघर्ष किया था।
चंद्रशेखर वैद्य का जन्म 7 जुलाई 1922 को हैदराबाद में हुआ था। उनका बचपन बेहद साधारण और आर्थिक तंगहाली के बीच बीता था। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें बहुत कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। वह केवल 7वीं कक्षा तक ही शिक्षा हासिल कर सके। इसके साथ ही महज 13 वर्ष की छोटी सी उम्र में उनकी शादी भी हो गई थी। इस तरह बचपन के दिनों में ही उनके कंधों पर दुनिया भर की जिम्मेदारियां आ गई थीं।
मुंबई का रुख और शुरुआती तंगहाली के दिन
चंद्रशेखर वैद्य की पढ़ाई छूटने और शादी होने के बाद भी उनके भीतर कुछ बड़ा करने का जज्बा हमेशा जिंदा रहा। इसी चाहत के साथ उन्होनें साल 1940 में मुंबई की ओर रुख किया। उस समय उनके पास न तो कोई बड़ा सहारा था और न ही काम का कोई जरिया।
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तब फेमस सिंगर शमशाद बेगम ने उनकी मदद की। उनकी सिफारिश पर चंद्रशेखर को पुणे के शालीमार स्टूडियो में काम मिला। चंद्रशेखर वैद्य ने साल 1950 में आई फिल्म ‘बेबस’ में एक मामूली जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी।
जूनियर आर्टिस्ट से फेमस एक्टर बनने की कहानी
चंद्रशेखर वैद्य ने करियर के शुरुआती दिनों में छोटी-मोटी और सह-कलाकार की भूमिकाएं निभाने के बाद साल 1953 में आई फिल्म ‘सुरंग’ में काम किया। इस फिल्म में वह मुख्य अभिनेता के तौर पर नजर आए।
इसके बाद उन्होंने ‘काली टोपी लाल रुमाल’, ‘बारादरी’, ‘बसंत बहार’ और एक्ट्रेस मधुबाला की फिल्म ‘बरसात की रात’ जैसी कई शानदार फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने जीवन के करियर में करीब 110 से ज्यादा फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया। एक्टर होने के साथ-साथ उन्होंने ‘चा चा चा’ और ‘स्ट्रीट सिंगर’ जैसी फिल्मों का निर्माण और डायरेक्शन भी किया।
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64 की उम्र में मिला वो मुकाम जो अमर हो गया
70 के दशक के अंत तक आते-आते लीड एक्टर के रूप में उनके पास काम कम होने लगा था। इसके बाद वह एक्टर के रूप में एक्टिव रहे। चंद्रशेखर वैद्य लंबे समय तक सिने आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे और कलाकारों के हित के लिए काम करते रहे।
साल 2000 में आई अभिनेता संजय दत्त की फिल्म ‘खौफ’ के बाद उन्होंने एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि, साल 1987 में पर्दे पर आए आर्य सुमंत के उनके किरदार ने उन्हें इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया।
