‘या अल्लाह! रसगुल्ला!’ टिप्पणी पर बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला, भारती सिंह-शेखर सुमन को 2010 के केस में बड़ी राहत

Bombay High Court Decision: बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारती सिंह और शेखर सुमन के खिलाफ 2010 में दर्ज FIR को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कॉमेडी के लिए बोले गए शब्दों को धार्मिक अपमान नहीं माना जा सकता।
Bharti Singh and Shekhar Suman case Bombay High Court decision
भारती सिंह और शेखर सुमन (फोटो- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Bharti Singh and Shekhar Suman case: कॉमेडी की दुनिया से जुड़ी एक लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में भारती सिंह और शेखर सुमन को बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने साल 2010 में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए साफ किया कि हास्य और तुकबंदी के उद्देश्य से किए गए शब्दों को धार्मिक अपमान नहीं माना जा सकता। यह मामला एक कॉमेडी शो के दौरान बोले गए कुछ शब्दों या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला! से जुड़ा था। इन शब्दों को लेकर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जिसके चलते भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि इन शब्दों का इस्तेमाल केवल हास्य और तुकबंदी के लिए किया गया था। अदालत ने कहा कि रसगुल्ला और  दही भल्ला जैसे खाद्य पदार्थ किसी एक धर्म से जुड़े नहीं हैं, बल्कि यह आम सामाजिक जीवन का हिस्सा हैं। इसलिए इन्हें धार्मिक अपमान के रूप में देखना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कलाकार के संवाद को अपराध साबित करने के लिए यह जरूरी है कि यह दिखाया जाए कि उन शब्दों का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को आहत करना था। इस मामले में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

कलाकारों की भूमिका पर टिप्पणी

अदालत ने यह भी कहा कि मनोरंजन कार्यक्रमों में कलाकार और जज आमतौर पर स्क्रिप्ट के अनुसार काम करते हैं और उनका उद्देश्य सिर्फ दर्शकों को हंसाना होता है। ऐसे में बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक कार्रवाई करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आज के दौर में सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाना आसान हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर मामले में आपराधिक कानून का इस्तेमाल किया जाए।

FIR और सभी कार्यवाही रद्द

अंत में अदालत ने कहा कि शिकायत में आवश्यक तथ्यों का अभाव है और आरोप प्रथम दृष्टया में सिद्ध नहीं होते। इसी आधार पर पायधोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाही को रद्द और निरस्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद भारती सिंह और शेखर सुमन को बड़ी राहत मिली है, वहीं यह निर्णय मनोरंजन जगत के लिए भी एक अहम मिसाल बनकर सामने आया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com