अभय देओल (फोटो- सोशल मीडिया)
Abhay Deol Birthday Special Story: एक्टर अभय देओल का जन्म 15 मार्च 1976 में मुंबई में हुआ था। अभय देओल आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। अभय देओल को आज भी उनकी चर्चित फिल्म ‘देव डी’ के लिए याद किया जाता है। इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि दर्शकों के बीच भी खास पहचान बनाई।
15 मार्च को जन्मे अभय देओल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर देओल परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के भतीजे हैं। उनके पिता अजीत सिंह देओल भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा चुके थे, लेकिन उन्हें अपने छोटे भाई धर्मेंद्र जैसी लोकप्रियता नहीं मिल पाई। अभय देओल ने स्कूल के दिनों से ही थिएटर के जरिए अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारना शुरू कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पहले से तय कर लिया था कि वह आगे चलकर अभिनय, चित्रकला, दर्शनशास्त्र या पत्रकारिता में से किसी एक क्षेत्र में करियर बनाएंगे। आखिरकार उन्होंने अभिनय को चुना।
अभय देओल ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म सोचा ना था से की थी। इसके बाद वह ओए लकी! लकी ओए! जैसी फिल्मों में नजर आए। हालांकि उन्हें असली पहचान निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म देव डी से मिली। इस फिल्म में अभय देओल ने देव का जटिल और भावनात्मक किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने काफी सराहा। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया और अभय देओल की अभिनय क्षमता की जमकर तारीफ हुई।
हालांकि ‘देव डी’ की सफलता के साथ-साथ इस किरदार का असर अभय देओल की निजी जिंदगी पर भी पड़ा। अभिनेता ने खुद एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि फिल्म की शूटिंग के बाद वह काफी समय तक इस किरदार से बाहर नहीं निकल पाए। उन्होंने बताया था कि वह लगभग एक साल तक शराब के नशे में डूबे रहे और देव के किरदार की तरह ही जीवन जीने लगे थे। इस दौरान वह अलग-अलग जगहों पर घूमते रहे और खुद को समझने की कोशिश करते रहे। हालांकि उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि उन्होंने फिल्म के किरदार की तरह फटे-पुराने कपड़े नहीं पहने थे।
फिल्म ‘देव डी’ महान लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास देवदास से प्रेरित थी। इस फिल्म में अभय देओल के साथ कई महिला किरदारों ने भी दर्शकों का दिल जीता था। आज भी ‘देव डी’ को हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिन्होंने पारंपरिक कहानी कहने के तरीके को बदलने में अहम भूमिका निभाई। वहीं अभय देओल की यह फिल्म उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक मानी जाती है।