15 साल बाद फिर 'ब्रांड दीदी' की अग्निपरीक्षा! बंगाल में इस बार भी होगा खेला या किले में सेंध लगाएगी BJP?

West Bengal Assembly Elections 2026: आज दूसरे चरण में ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट समेत 142 सीटों पर मतदान। 15 साल की सत्ता के बाद 'दीदी' के गढ़ में भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर।
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ममता बनर्जी, PM मोदी (Image- Social Media)
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West Bengal Assembly Elections 2026: ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में करीब 15 साल तक बने रहने के बाद एक बार फिर इतिहास रचने के करीब हैं। TMC सुप्रीमो के रूप में उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

ऐसे समय में जब भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के दम पर पूरे जोश के साथ चुनावी मैदान में उतरी है, ममता बनर्जी अब भी एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में डटी हुई दिखती हैं। उनके कार्यकाल में वामपंथी दलों का प्रभाव लगभग खत्म हो गया, वहीं Indian National Congress भी काफी कमजोर पड़ी। हालांकि, हाल के वर्षों में बीजेपी ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए खुद को प्रमुख चुनौती के रूप में स्थापित कर लिया है।

‘दीदी’ ब्रांड की अग्निपरीक्षा

इस चुनाव में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी ही है। भ्रष्टाचार के आरोपों और संभावित सत्ता-विरोधी माहौल के बीच यह सवाल अहम है कि क्या टीएमसी एक बार फिर अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी को मात दे पाएगी। ममता की लोकप्रियता सिर्फ उनके शासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और “मां, माटी, मानुष” की राजनीति ने उन्हें जनता से गहराई से जोड़े रखा है।

राजनीतिक सफर और उभार

1970-80 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की। वे 1984 में पहली बार सांसद बनीं और धीरे-धीरे पश्चिम बंगाल में वामपंथ के खिलाफ सबसे मुखर चेहरा बनकर उभरीं। 1997 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और CPI(M) के खिलाफ मजबूत विकल्प के रूप में सामने आईं। 2006 का सिंगूर आंदोलन उनकी राजनीति का अहम टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने टाटा के नैनो प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के पक्ष में लंबा आंदोलन किया।

2011: सत्ता परिवर्तन का साल

2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 वर्षों से सत्ता में रही वाम सरकार को हटाकर 294 में से 184 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने अपनी जीत दोहराई। 2021 में नंदीग्राम से हार के बावजूद उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक ओर बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी मजबूत पकड़ और “ब्रांड दीदी” की छवि के सहारे फिर से जीत का दावा कर रही हैं।

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