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ममता की हैट्रिक या BJP का उदय…बंगाल चुनाव में ऐतिहासिक वोटिंग के क्या मायने? हर बार मिले हैं अलग नतीजे

West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में 92% रिकॉर्ड मतदान हुआ। SIR प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस भारी वोटिंग ने सत्ता और विपक्ष दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Apr 24, 2026 | 06:49 AM

बंगाल चुनाव (Image- IANS)

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West Bengal Elections 2026 Record Voter Turnout: पश्चिम बंगाल के चुनावों में हमेशा से ही उच्च मतदान देखने को मिलता रहा है, लेकिन गुरुवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो आज़ादी के बाद अब तक का सबसे ऊँचा आंकड़ा है। इस अभूतपूर्व मतदान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। बीजेपी इसे ममता बनर्जी सरकार के अंत का संकेत बता रही है, जबकि ममता बनर्जी का कहना है कि यह भारी मतदान उनकी जीत सुनिश्चित करता है।

पिछला विधानसभा चुनाव 2021 में कोविड महामारी के दौरान हुआ था, जिसमें तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। उस समय 82.30 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार यह आंकड़ा पार करते हुए नया रिकॉर्ड बना है।

SIR विवाद के बीच रिकॉर्ड मतदान

यह चुनाव चुनाव आयोग द्वारा कराए गए वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच हो रहा है। इस प्रक्रिया में करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिसको लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है। इन सबके बावजूद, कई वर्षों बाद बंगाल में अपेक्षाकृत कम हिंसा के साथ शांतिपूर्ण मतदान हुआ है। पहले जहां हिंसा के कारण आठ चरणों में मतदान होता था, इस बार केवल दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं और पहले ही चरण में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई है।

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बंगाल चुनाव (Image- IANS)

बंगाल में उच्च मतदान की परंपरा

बंगाल में लंबे समय से मतदान प्रतिशत ऊँचा रहा है। 1996 के विधानसभा चुनाव में लगभग 83 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2001 में यह घटकर करीब 75 प्रतिशत रहा, लेकिन 2006 में फिर से बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2011 में 84 प्रतिशत मतदान हुआ, जब 34 साल पुरानी वाम सरकार का अंत हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। 2016 और 2021 में भी मतदान करीब 82 प्रतिशत रहा। इस बार 90 प्रतिशत से अधिक मतदान न सिर्फ राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नया रिकॉर्ड है।

SIR का असर कैसे पड़ा

SIR प्रक्रिया में हर विधानसभा सीट पर औसतन 20 से 30 हजार नाम हटाए गए, जबकि मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में यह संख्या करीब 50 हजार प्रति सीट रही। इससे कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई और प्रतिशत बढ़ गया।

बंगाल चुनाव (Image- IANS)

उदाहरण के तौर पर, यदि पहले 3 लाख मतदाता थे और 2.4 लाख लोगों ने वोट दिया (80%), और अब कुल मतदाता घटकर 2.7 लाख रह गए, तो वही 2.4 लाख वोट 88% हो जाएंगे। यानी वास्तविक संख्या समान रहने पर भी प्रतिशत बढ़ जाता है।

नाम कटने का डर और बढ़ी भागीदारी

विश्लेषकों के अनुसार, कई मतदाताओं को डर था कि अगर वे वोट नहीं देंगे तो उनका नाम स्थायी रूप से हट सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों ने दोबारा पंजीकरण कराया, उनमें मतदान को लेकर नया उत्साह भी देखा गया। कुछ प्रवासी मतदाता भी विशेष रूप से वोट देने लौटे। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटने से प्रतिशत स्वाभाविक रूप से बढ़ा है। यह ट्रेंड अन्य राज्यों में भी देखा गया है।

ज्यादा मतदान के पीछे कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में उच्च मतदान के तीन मुख्य कारण हैं मजबूत संगठनात्मक ढांचा, मतदाताओं में उत्साह, और राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा, खासकर बीजेपी और टीएमसी के बीच।

ममता बनर्जी(Image- IANS)

ज्यादा मतदान का मतलब हर बार अलग

विश्लेषक प्रभाकरमणि तिवारी के अनुसार, ज्यादा मतदान का अर्थ हर बार एक जैसा नहीं होता। 2011 में इससे सत्ता परिवर्तन हुआ, जबकि 2021 में सत्तारूढ़ दल की सीटें बढ़ीं। यानी अधिक मतदान सिर्फ जनता की सक्रिय भागीदारी दिखाता है, न कि किसी एक पक्ष की निश्चित जीत।

महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भूमिका

हाल के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर या उससे अधिक रही है। युवाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जिससे मतदान का सामाजिक स्वरूप बदल रहा है।

बंगाल चुनाव (Image- IANS)

यह भी पढ़ें- आजादी के बाद से अब तक का…बंगाल और तमिलनाडु के वोटर्स को ECI ने किया सलाम, 92+ से बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

रिकॉर्ड मतदान को लेकर तृणमूल कांग्रेस इसे अपने पक्ष में माहौल बता रही है, जबकि बीजेपी इसे सरकार के खिलाफ जनमत बता रही है। दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से इसे जीत का संकेत मान रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 90 प्रतिशत से अधिक मतदान का यह आंकड़ा किसके पक्ष में जाता है। इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

West bengal assembly election first phase record 92 percent voting sir impact

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Published On: Apr 24, 2026 | 06:49 AM

Topics:  

  • Assembly Election 2026
  • BJP
  • TMC
  • West Bengal Assembly Election

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