तमिलनाडु चुनाव: चेन्नई की सड़क पर TVK समर्थकों के लिए बिछाया गया 'मौत का जाल'? स्टालिन सरकार पर लगा बड़ा आरोप

TVK vs Stalin: चेन्नई में चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था विफल होने के चलते विजय को अपना कार्यक्रम बीच में ही रोकना पड़ा, जिसके बाद उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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थलापति विजय, फोटो- सोशल मीडिया
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Tamil Nadu Assembly Election 2026: तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब अभिनेता से नेता बने विजय के प्रचार अभियान में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। चेन्नई की सड़कों पर अपने चहेते नेता की झलक पाने के लिए उमड़ा हजारों समर्थकों का हुजूम पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो गया, जिसके कारण विजय को सुरक्षा कारणों से अपना दौरा रद्द करना पड़ा।

सोमवार को हुई यह घटना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं रह गई है, बल्कि इसने सत्तारूढ़ दल और नई उभरती पार्टी टीवीके के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप लगाया गया कि चुनाव के समय सुरक्षा में ऐसी चूक न केवल उम्मीदवार बल्कि आम जनता के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।

जब पेरंबूर की सड़कों पर बेकाबू हुई भीड़

सोमवार को विजय ने चेन्नई के पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया। यहीं से वे अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं। नामांकन के बाद जैसे ही उन्होंने प्रचार शुरू किया, हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर जुट गए। विजय ने अपनी शिकायत में बताया कि पेरंबूर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था, जिससे उनकी और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा।

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नामांकन करते थलापति विजय

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम के कारण उनका काफिला पूरी तरह थम गया और तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ना असंभव हो गया। सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए विजय ने अपना प्रचार बीच में ही रोकने का कठिन फैसला लिया।

विजय ने बीच में रोका प्रचार

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक विवाद कोलाथुर इलाके को लेकर हो रहा है। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम का आरोप है कि जहां पेरंबूर में नामांकन के समय कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे, वहीं कोलाथुर पहुंचते ही पुलिस बल पूरी तरह नदारद हो गया। टीवीके के महासचिव आधव अर्जुन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाया कि अगर नामांकन स्थल पर इंतजाम हो सकते थे, तो प्रचार मार्ग पर पुलिस क्यों नहीं थी? उन्होंने दावा किया कि पुलिस की जानबूझकर की गई इस अनुपस्थिति के कारण सड़कों पर अफरातफरी मच गई। किसी भी चुनावी अभियान में रूट सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है, और यहाँ उसी जिम्मेदारी में बड़ी कमी पाई गई है।

स्टालिन सरकार पर भगदड़ करवाने का आरोप

टीवीके ने इस सुरक्षा चूक को महज एक संयोग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। आधव अर्जुन ने पिछले साल करूर में हुई उस दुखद भगदड़ का जिक्र किया जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन सरकार चाहती है कि कोलाथुर में भी वैसी ही 'मानव निर्मित' भगदड़ की स्थिति पैदा हो ताकि विजय के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। विजय ने खुद डीएमके को 'बुराई की ताकत' बताते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे की बढ़ती समस्या के लिए सीधे मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया है।

अधिकारियों के तबादले की उठी मांग

विजय ने तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराने और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। टीवीके का मानना है कि कुछ अधिकारी सत्ताधारी दल के दबाव में पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। पार्टी ने ऐसे अधिकारियों के तत्काल तबादले की मांग की है ताकि 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सभी उम्मीदवारों को समान और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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