पुडुचेरी चुनाव: वकालत से सत्ता के शिखर तक कैसे चमके V Narayanasamy? ‘सियासी संकट’ के बीच की अनकही कहानी
V Narayanasamy biography: वी नारायणसामी पुडुचेरी के 10वें मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। वकालत से करियर शुरू कर उन्होंने केंद्र में मंत्री और राज्य में सीएम तक का शानदार सफर तय किया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
वी. नारायणसामी, फोटो- सोशल मीडिया
Puducherry Ex Chief Minister history: पुडुचेरी की राजनीति में जब भी किसी कद्दावर और अनुभवी चेहरे का जिक्र होता है, तो वी. नारायणसामी (V Narayanasamy) का नाम सबसे ऊपर आता है। 30 मई 1947 को जन्मे नारायणसामी ने अपने जीवन के सात दशक से अधिक समय को सार्वजनिक सेवा और राजनीति के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया है।
उनकी कहानी केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की है जिसने वकालत के पेशे से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली और अपने गृह राज्य पुडुचेरी की किस्मत बदलने में अहम भूमिका निभाई।
अदालती गलियारों से संसद तक का लंबा सफर
नारायणसामी (V Narayanasamy) का जन्म पुडुचेरी के एक साधारण लेकिन संस्कारी परिवार में श्री वेलु और श्रीमती ईश्वरी के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा टैगोर आर्ट कॉलेज से हुई, जिसके बाद उन्होंने कानून की बारीकियों को समझने के लिए मद्रास लॉ कॉलेज और अन्नामलाई यूनिवर्सिटी का रुख किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें कानूनी नियमों के कारण अपनी वकालत की प्रैक्टिस को निलंबित करना पड़ा, लेकिन उनके भीतर का ‘कानून का जानकार’ हमेशा उनके फैसलों और बयानों में झलकता रहा।
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उनकी राजनीतिक यात्रा 1985 में पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुई थी, जिसके बाद उन्होंने लगातार तीन बार इस सदन में पुडुचेरी का प्रतिनिधित्व किया। व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने स्वर्गीय एन. कलैसेल्वी से विवाह किया और उनके दो बच्चे हैं, जो उनके संघर्षपूर्ण जीवन में हमेशा संबल बने रहे।
मनमोहन सरकार में भरोसेमंद मंत्री और संकटमोचक की भूमिका
दिल्ली की राजनीति में नारायणसामी को एक शांत लेकिन बेहद प्रभावी ‘संकटमोचक’ के तौर पर पहचाना जाता था। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा, उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय और कार्मिक एवं जन शिकायत मंत्रालय में भी अपनी विशिष्ट सेवाएं दीं।
केंद्र में रहते हुए उन्होंने कई जटिल प्रशासनिक मुद्दों को अपनी सूझबूझ से सुलझाया और कांग्रेस आलाकमान के सबसे भरोसेमंद सिपाहियों में शामिल रहे। उनके पास योजना आयोग के सदस्य के रूप में भी कार्य करने का गहरा अनुभव है, जो उनकी प्रशासनिक दक्षता और विकास के प्रति उनकी दूरगामी सोच का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है।
मुख्यमंत्री की कुर्सी और वो यादगार सियासी इस्तीफा
साल 2016 V Narayanasamy के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ जब उन्हें पुडुचेरी का 10वां मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। हालांकि, उनका यह कार्यकाल फूलों की सेज नहीं था और उन्हें तत्कालीन उपराज्यपाल किरण बेदी के साथ लगातार होने वाले प्रशासनिक मतभेदों का सामना करना पड़ा। उन्होंने हमेशा केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारों और जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
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फरवरी 2021 में जब उनकी सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत खो दिया, तो उन्होंने किसी भी तरह की जोड़-तोड़ करने के बजाय गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लगभग 6.19 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति वाले नारायणसामी आज भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं।
