जम्मू-कश्मीर में पीडीपी को बड़ा झटका, महबूबा मुफ्ती के राइट हैंड ने छोड़ी पार्टी

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद से ही सियासी हलचल शुरू हो गई है। सियासतदानों की उछलकूद का भी आगाज हो गया है। मंगलवार को राज्य में इसकी बानगी तब देखने को मिली जब महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी को झटका देते हुए मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने पार्टी को अलविदा कह दिया।
जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और महबूबा मुफ्ती को झटका देते हुए सुहैल बुखारी ने छोड़ी पार्टी
महबूबा मुफ्ती व सुहैल बुखारी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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श्रीनगर:  जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद से ही सियासी हलचल शुरू हो गई है। सियासतदानों की उछलकूद का भी आगाज हो गया है। मंगलवार को राज्य में इसकी बानगी तब देखने को मिली जब महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी को झटका देते हुए मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने पार्टी को अलविदा कह दिया।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव से पहले मंगलवार को पार्टी छोड़ दी। सुहैल बुखारी ने से कहा कि उन्होंने पीडीपी छोड़ दी है। इससे अधिक उन्होंने कुछ नहीं कहा। प्रतीत होता है कि वह चुनाव लड़ने के लिए मंजूरी नहीं दिये जाने से नाराज थे।

यह है पार्टी छोड़ने की वजह

पीडीपी के पूर्व प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें वागूरा-क्रीरी से चुनाव लड़ने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले महीने पूर्व मंत्री बशारत बुखारी के पीडीपी में वापस आने से उन्हें टिकट मिलने की संभावना कम हो गई। यही वजह  है कि बुखारी ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए नई संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।

पत्रकार से नेता बने सुहैल बुखारी पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के करीबी माने जाते थे। जब महबूबा मुख्यमंत्री थीं तब वह उनके सलाहकार भी थे। कहा जाता है कि महबूबा हर एक निर्णय में बुखारी की सलाह लिया करती थीं।

अस्तित्व बचाना पीडीपी की चुनौती

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन टिकट कटने की आशंका से परेशान कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया है।

क्या होगा सुहैल का रुख

सुहैल बुखारी के पार्टी छोड़ने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर रुख कर सकते हैं। बशर्ते फारूख अब्दुल्ला की पार्टी उन्हें वागूरा-क्रीरी टिकट देने का आश्वासन देगी तब। अगर ऐसा नहीं होगा तो वह निर्दलीय भी चुनावी मैदान में आ सकते हैं।

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