असम चुनाव: बिहार, बंगाल और अब असम…क्या AIMIM का विस्तार कर रहे हैं ओवैसी? CM हिमंता के खिलाफ करेंगे प्रचार
Assam Election: ओवैसी असम चुनाव में बदरुद्दीन अजमल के लिए प्रचार करने वाले हैं। इसके अलावा वह बंगाल में हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन कर चुके हैं। क्या ओवैसी की मंशा AIMIM को राष्ट्रीय पार्टी बनाना है?
- Written By: सजल रघुवंशी
ओवैसी (सोर्स- डिजाइन इमेज)
Owaisi Entry In Assam Election: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले असम में एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के लिए असदुद्दीन ओवैसी प्रचार करने वाले हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को कहा कि ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को असम का दौरा करेंगे जहां वह विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम आठ जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इस चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य उद्देश्य अजमल के लिए समर्थन जुटाना होगा जो बिन्नाकंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि औवेसी ने इससे कुछ दिन पहले ही बंगाल की सियासत में हुमायूं कबीर के साथ आकर ममता और भाजपा को कड़ी चुनौती देने का ऐलान किया है। वहीं अगर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की बात करें तो ओवैसी ओवैसी की पार्टी AIMIM ने उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत हासिल की। तो क्या राज्य स्तरीय पार्टी का विकास और विस्तार करते हुए ओवैसी इसे राष्ट्रीय पार्टी बनाना चाहते हैं?
बंगाल में हुमायूं के साथ किया गठबंधन
दरअसल, एआईएमआईएम को लेकर चर्चा उस समय और उठी जब ओवैसी ने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने की बजाय हुमायूं कबीर के साथ आने का फैसला लिया। हालांकि ओवैसी चाहते तो उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ सकती थी लेकिन उनके इस फैसले के बाद कई राजनीतिक जानकार ऐसा मान रहे हैं कि वह मुस्लिम वोटबैंक का ध्रुवीकरण नहीं चाहते थे। अब इसके पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि अगर मुस्लिम वोटबैंक का ध्रुवीकरण होता तो उनकी पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता था लेकिन कबीर के साथ आकर उन्होंने अपने वोटबैंक को भी सुरक्षित कर लिया। अब साथ आने का फैसला इसलिए भी लिया हो क्योंकि जब 2021 के चुनाव में ओवैसी ने अकेले चुनाव लड़ा था तब उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ था। यहां तक की 7 में से उनका एक भी उम्मीदवार नहीं जीत पाया था।
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बिहार चुनाव में भी दिखा ओवैसी का जलवा
बिहार चुनाव 2025 में ओवैसी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी लेकिन बाद उनके पांच में से चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे लेकिन बिहार की उन्हीं पांच सीटों पर इस बार ओवैसी की पार्टी ने फिर से जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया कि उनका वोटबैंक सिर्फ उनकी पार्टी से मतलब रखता है और ओवैसी पर उन्हें पूरा विश्वास है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को 1.85 प्रतिशत वोट मिले थे।
असम में अजमल का सपोर्ट कर क्या संकेत देना चाहते हैं ओवैसी?
अब बताया जा रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम आठ जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इन सभाओं का मकसद बदरुद्दीन अजमल के लिए माहौल बनाना है लेकिन इसके अलावा ऐसा माना जा रहा है कि ओवैसी असम में यह मैसेज देना चाहते हैं कि उनकी लड़ाई सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी से है और वह मुस्लिमों के लिए काम करने वाले नेताओं के समर्थन में है।
क्या राष्ट्रीय पार्टी बनाना चाहते हैं ओवैसी?
कई जानकारों का ऐसा मानना है कि ओवैसी अपनी पार्टी एआईएमआईएम को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए तेजी से विस्तार की रणनीति पर काम कर रहे हैं। तेलंगाना से बाहर निकलकर उन्होंने बिहार में तो अच्छा प्रदर्शन किया ही साथ ही अब वह बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव लड़कर और क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के साथ गठजोड़ कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस रणनीति का मकसद अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों के लिए एक स्वतंत्र और प्रभावी राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने के साथ-साथ एक ‘पॉलिटिकल फुटप्रिंट’ छोड़ना भी है जो उन्हें आगे चलकर मदद देगा और उनके वोेट परसेंट में इजाफा करेगा।
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हिमंता के खिलाफ भी बनेगा माहौल?
दरअसल, ओवैसी ने असम में चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी सभाएं करने का फैसला किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वह मुस्लिमों के मुद्दे को उठाएंगे और हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश भी करेंगे लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि उनकी इन सभाओं से असम के चुनावी समीकरण में कितना असर पड़ेगा।
