

मुंबई: महाराष्ट्र चुनाव में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। नामांकन दाखिल होने के बाद नेताओं अब चुनाव प्रचार में जुट गए है। दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर रस्साकशी अंतिम समय तक चली। कौन सा दल कितनी सीटाें लड़ेगा इसका ऐलान नहीं हुआ। सभी दलों ने एक-एक कर अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करना शुरू कर दिया था। बावजूद इसके अब भी विवाद खत्म नहीं हुआ है। महायुति में शामिल बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना में कई सीटों पर विवाद की स्थिति अब बनी हुई है।
बीजेपी लगातार एनसीपी नेता नवाब मलिक की उम्मीदवारी का विरोध करती रही। इधर नवाब मलिक ने टिकट नहीं मिलने के स्थिति में मंलगवार को दो नामांकन दाखिल कर दिए थे। हालांकि कुछ देर बाद एनसीपी ने उन्हें उम्मीदवारी देने की घाेषणा कर दी। इधर महायुति में शामिल एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सुरेश पाटिल को मानखुर्द शिवाजी नगर से टिकट दे दिया।
मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार ने नवाब मलिक को मानखुर्द शिवाजी नगर से उम्मीदवारी देने के बाद कहा कि बीजेपी उनके लिए प्रचार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हम शिवसेना के सुरेश पाटिल का समर्थन करेंगे। इसके बाद नवाब मलिक ने बीजेपी पर निशाना साधा है।
नवाब मलिक ने कहा कि "जिस निर्वाचन क्षेत्र से एनसीपी ने मुझे मैदान में उतारा है, मानखुर्द शिवाजी नगर, वहां शिवसेना के उम्मीदवार सुरेश पाटिल हैं। भाजपा उनका समर्थन कर रही है। मेरी बेटी के निर्वाचन क्षेत्र में भी यही स्थिति है। इसलिए, अगर भाजपा या शिवसेना का शिंदे गुट मेरा विरोध कर रहा है, तो यह हमारे लिए चिंता की बात नहीं है।"
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि "दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में, हमें भारी बहुमत मिलेगा। मैं लोगों के आग्रह पर मानखुर्द शिवाजी नगर से चुनाव लड़ रहा हूं। लोगों ने मुझे चुनाव में आमंत्रित किया है। चाहे बीजेपी हो या शिवसेना, जो मेरा विरोध करे, लोगों का विश्वास और समर्थन हमारे साथ है। हम दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में जीतेंगे।
नवाब मलिक ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि "जहां तक भाजपा का सवाल है, अजित पवार ने उनके साथ राजनीतिक समझौता कर लिया है। एनसीपी और नवाब मलिक ने विचारधारा से समझौता नहीं किया हैं। हमारी विचारधारा स्पष्ट है, हम धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करते हैं।"
मानखुर्द शिवाजी नगर से एनसीपी उम्मीदवार नवाब मलिक ने कहा कि जहां तक चुनावों का सवाल है, मुकाबला कड़ा है। यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में अजित पवार के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती और वे विचारधाराओं के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।