

Nitin Nabin-Mallikarjun Kharge Controversial Statement: चुनाव के दौरान अक्सर नेताओं की भाषा में तल्खी आ जाती है, लेकिन कभी-कभी यह मर्यादा की सीमा को लांघने लगती है। असम की चुनावी धरती से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐसा बयान दिया है जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। खरगे के बीजेपी और आरएसएस पर की गई 'जहरीले सांप' वाले बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
असम में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक विवादित उदाहरण पेश किया। उन्होंने कथित तौर पर कुरान का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि नमाज पढ़ते समय सामने से कोई जहरीला सांप गुजर रहा हो, तो नमाज छोड़कर पहले उस सांप को मार देना चाहिए। खरगे ने इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए आरएसएस और भाजपा की तुलना उसी जहरीले सांप से कर दी। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब बीजेपी ने इसे न केवल एक अपमानजनक टिप्पणी माना है, बल्कि इसे एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश के रूप में भी देखा है।
इस बयान पर पलटवार करने में बीजेपी ने भी देर नहीं की। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) ने मल्लिकार्जुन खरगे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से एक सज्जन व्यक्ति हैं और ऐसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग नहीं करते थे। नवीन का आरोप है कि खरगे के मुंह से जो शब्द निकल रहे हैं, वे दरअसल गांधी परिवार के हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी कांग्रेस के नेताओं को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं। बीजेपी का मानना है कि खरगे को ये बातें सिखाई गई हैं और वे केवल वही बोल रहे हैं जो उन्हें शीर्ष नेतृत्व से निर्देश मिला है।
मल्लिकार्जुन खरगे के गुजरात को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरदार पटेल और महात्मा गांधी भी इसी गुजरात से आए थे और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश को आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी मूर्खता है। जनता देख रही है कि जब भी वे हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर तो कभी जनता पर आरोप लगाते हैं। अगर वे अपनी हार की जिम्मेदारी खुद लेते, तो कुछ नया सीख पाते।
विवाद केवल बयानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह कानूनी दांव-पेच में भी उलझ गया है। दिल्ली बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है। बीजेपी की इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खरगे की टिप्पणी चुनाव प्रचार के नियमों का उल्लंघन है और यह सांप्रदायिक रूप से लोगों को भड़काने का एक प्रयास है। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए और उचित कानूनी कार्रवाई हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब-जब कांग्रेस ने इस तरह की कठोर शब्दावली का इस्तेमाल किया है, जनता ने अक्सर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानूनी लड़ाई चुनावों के अंतिम परिणामों पर क्या असर डालती है।
इस पूरे प्रकरण में नितिन नवीन ने पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री के बीच चल रहे पुराने विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में शब्दों की एक निश्चित सीमा होनी चाहिए, लेकिन जब बात राष्ट्रीय हित की आती है, तो मुद्दों को उजागर करना जरूरी हो जाता है।
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उन्होंने पासपोर्ट के मामले में हुए कथित हेर-फेर की ओर भी इशारा किया और कहा कि भविष्य में सच सबके सामने आएगा। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें यह समझने की जरूरत है कि चुनावी माहौल में शोर-शराबा तो होगा ही, लेकिन क्या वह शोर विकास और जनहित के मुद्दों को दबा रहा है? अंततः मतदाता का भविष्य नेताओं के इन्हीं शब्दों और उनके द्वारा किए गए कार्यों के बीच की सच्चाई पर निर्भर करता है।