MVA में दरार? पवन खेड़ा के 'बड़बोलेपन' पर भड़की शिवसेना UBT; आनंद दुबे- असम में कांग्रेस को होगा भारी नुकसान

Anand Dubey on Pawan Khera: शिवसेना UBT नेता आनंद दुबे ने पवन खेड़ा के बयानों की आलोचना की। कहा- असम चुनाव में निजी हमलों से कांग्रेस को होगा नुकसान।
Anand Dubey on Pawan Khera
Anand Dubey on Pawan Khera (फोटो क्रेडिट-X)
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Shiv Sena UBT vs Congress: असम विधानसभा चुनाव के गरमाते माहौल के बीच महाराष्ट्र की राजनीति से एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। महाविकास अघाड़ी (MVA) की सहयोगी पार्टी शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को एक तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पवन खेड़ा के 'बड़बोलेपन' और व्यक्तिगत हमलों की वजह से असम में कांग्रेस की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

आनंद दुबे का यह बयान उस वक्त आया है जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पवन खेड़ा के बीच पासपोर्ट और नागरिकता जैसे विषयों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। दुबे ने स्पष्ट किया कि चुनाव मुद्दों, नीतियों और विकास पर आधारित होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत लांछनों पर।

पासपोर्ट विवाद पर जताई नाराजगी

शिवसेना (UBT) नेता ने पवन खेड़ा द्वारा पासपोर्ट से जुड़े विषयों को चुनावी चर्चा में लाने की आलोचना की। उन्होंने कहा, "पासपोर्ट वाला विषय लाना ही नहीं चाहिए था। पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा ने इस चुनाव को पूरी तरह से व्यक्तिगत (Personal) बना दिया है, जबकि यह मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस की विचारधारा और नीतियों पर होना चाहिए था।" दुबे के अनुसार, जब चुनाव व्यक्तिगत लड़ाई बन जाता है, तो असली मुद्दे गौण हो जाते हैं और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी

आनंद दुबे ने नसीहत देते हुए कहा कि पवन खेड़ा कांग्रेस के एक बड़े और जिम्मेदार नेता हैं, उन्हें ऐसी चीजों से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के बयानों से चुनाव का माहौल बिगड़ जाता है और मतदाता भ्रमित हो जाते हैं। दुबे का मानना है कि इन व्यक्तिगत विषयों का जनता के असल सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं है। शिवसेना (UBT) की यह सार्वजनिक आलोचना असम में विपक्षी एकता और रणनीति पर भी सवाल खड़े कर रही है।

विकास बनाम व्यक्तिगत हमला

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी के भीतर इस तरह की बयानबाजी से यह संकेत मिल रहे हैं कि सहयोगी दल अब कांग्रेस की आक्रामक और कभी-कभी 'विवादास्पद' बयानबाजी से दूरी बनाना चाहते हैं। आनंद दुबे ने अंत में जोर देकर कहा, "चुनाव मुद्दों पर, विकास पर, नीति और रणनीति पर होने चाहिए। हमें लगता है कि पवन खेड़ा को चुनाव को व्यक्तिगत होने से रोकना चाहिए था।" अब देखना यह होगा कि असम चुनाव के अंतिम चरणों में कांग्रेस अपनी रणनीति में कोई बदलाव करती है या नहीं।

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