कल्याण ग्रामीण विधानसभा सीट (डिजाइन फोटो)
मुंबई: महाराष्ट्र में चुनावी शंखनाद होने ही वाला है। अगले दो महीनों में यहां की राज्य चुनावी कुरुक्षेत्र और हर विधानसभा सीट महाभारत के मोर्चे के रूप में सामने आएगी। इस चुनावी महाभारत में कौन किसे मात देगा। महाराष्ट्र की मायानगरी में सिंहासन किसे हासिल होगा यह भले ही भविष्य की गर्त में है लेकिन चुनावी संग्राम के लिए महारथी तैयार होने लगे हैं। हर सिपहसालार के रथ पार लहराते हुए पार्टियों के झंडे इस बात का उद्घोष कर रहे हैं कि इस बार महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच लड़ा जाने वाला महाराष्ट्र का चुनावी महाभारत दिलचस्प होने वाला है।
चुनावी महाभारत के स्वागत में हम आप तक हर मोर्चे के सारे समीकरण इतिहास के साथ पहुंचा रहे हैं। किस मोर्चे पर इससे पहले लड़ी गई जंग में किसने कब्जा जमाया, किसने किसके किले में सेंधमारी की। किसने कहां और किसे नेस्ताबूद किया, जैसी सारी जानकारी लेकर हम लगातार आपके बीच में बने हुए हैं। इसी कड़ी में आज हम कल्याण ग्रामीण सीट की बात करने जा रहे हैं।
जनपद थाणे और कल्याण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस विधानसभा सीट पर अब तक तीन बार चुनावी संग्राम लड़ा जा चुका है। तीनों सियासी संग्रामों में से दो बार यहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को विजय मिली है। जबकि एक बार शिवसेना के प्रत्याशी ने जीत दर्ज करने में कामयाबी हासिल की है। 2009 और 2019 में सीट मनसे के हिस्से आई है, तो वहीं 2014 में यहां शिवसेना ने बाजी मारी थी।
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कल्याण ग्रामीण सीट पर सवर्ण वोटर्स का दबदबा माना जाता है। कहा जाता है कि यहां जिसने सवर्णों को अपने खेमें में कर लिया उसकी जीत लगभग तय है। यहां सिर्फ पाटिल वोटर्स करीब 30 हजार के आस-पास हैं। इसके अलावा यहां 20 हजार दलित, 16 हजार मुस्लिम और करीब 8 हजार आदिवासी वोटर्स भी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करते हैं। 2019 के आंकड़ों के मुताबिक 4 लाख 24 हजार से ज्यादा वोटों वाली इस सीट पर करीब 58 फीसदी ग्रामीण वोटर्स हैं।
2019 में कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में कुल 4 लाख 24 हजार 976 मतदाता थे। जबकि चुनाव में कुल 1 लाख 97 हजार 914 वोट पोल हुए थे। इन चुनावों में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार प्रमोद (राजू) रतन पाटिल इस सीट से जीत कर विधायक बने। उन्हें कुल 93927 वोट मिले। शिवसेना के उम्मीदवार म्हात्रे रमेश सुक्रिया कुल 86773 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वे 7154 वोटों से हार गए। जीत हार के अंतर के लिहाज से इस बार यहां ऊंट किस करवट बैठेगा यह कह पाना कठिन है।