शैलजा टीचर, फोटो- सोशल मीडिया
Kerala Assembly Election 2026: केरलम की राजनीति में एक ऐसा नाम है जो सत्ता की चमक-धमक से दूर, अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए दुनिया भर में मिसाल बन गया है। हम बात कर रहे हैं के. के. शैलजा की, जिन्हें लोग प्यार और सम्मान से ‘शैलजा टीचर’ कहकर पुकारते हैं।
20 नवंबर 1956 को कन्नूर के मट्टनूर में जन्मी शैलजा का जीवन एक साधारण महिला के असाधारण साहस की कहानी है। एक आम नागरिक के लिए उनकी कहानी यह सिखाती है कि कैसे एक छोटे से गांव की शिक्षिका अपने फौलादी इरादों से वैश्विक महामारी के सामने ढाल बनकर खड़ी हो सकती है। आज भले ही वे कैबिनेट का हिस्सा न हों, लेकिन केरलम के स्वास्थ्य ढांचे में उनके द्वारा किए गए सुधारों का असर आज भी हर घर में महसूस किया जाता है।
शैलजा टीचर का राजनीति में आना कोई इत्तेफाक नहीं था। उनके परिवार की जड़ें वामपंथी विचारधारा और समाज सेवा में बहुत गहरी थीं। वे अपनी दादी एम. के. कल्याणी से बहुत प्रभावित थीं, जो छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ती थीं और चेचक जैसी बीमारियों के दौरान मरीजों की सेवा करती थीं। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, शैलजा ने करीब 23 वर्षों तक शिवपुरम हाई स्कूल में फिजिक्स की टीचर के रूप में काम किया।
अब आता है साल 2004, जब उन्होंने अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले लिया ताकि वे अपना पूरा समय राजनीति और जनसेवा को दे सकें। एक शिक्षक के रूप में उनका अनुभव ही था जिसने उन्हें समस्याओं को गहराई से समझने और बहुत ही धैर्य के साथ उनका समाधान निकालने की ताकत दी।
शैलजा टीचर की असली परीक्षा तब शुरू हुई जब 2016 में उन्हें केरलम का स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। 2018 में जब केरलम पर ‘निपाह’ वायरस का खतरा मंडराया, तो उन्होंने जिस मुस्तैदी से स्थिति को संभाला, उसने सबको हैरान कर दिया। लेकिन उनकी नेतृत्व क्षमता का असली लोहा दुनिया ने तब माना जब 2020 में कोविड-19 महामारी ने दस्तक दी।
उनके सटीक फैसलों, ट्रेसिंग और आइसोलेशन की रणनीतियों के कारण केरलम ने संक्रमण की पहली लहर को बहुत प्रभावी ढंग से रोका। ‘द गार्जियन’ ने उन्हें “कोरोनावायरस स्लेयर” और “रॉकस्टार हेल्थ मिनिस्टर” की उपाधि दी। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया और ‘प्रोस्पेक्ट’ मैगजीन ने उन्हें 2020 का दुनिया का ‘टॉप थिंकर’ चुना। यह एक भारतीय महिला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की बहुत बड़ी बात थी।
साल 2021 के केरलम विधानसभा चुनाव में शैलजा टीचर ने मट्टनूर निर्वाचन क्षेत्र से जीत का एक ऐसा कीर्तिमान रचा जो केरलम के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा मार्जिन है; उन्होंने 60,963 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इतनी अपार लोकप्रियता और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, उन्हें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की दूसरी कैबिनेट में जगह नहीं दी गई।
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इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर काफी विवाद पैदा किया, क्योंकि उनके समर्थक उन्हें दोबारा स्वास्थ्य मंत्री के रूप में देखना चाहते थे। हालांकि, एक अनुशासित सिपाही की तरह उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार किया।
शैलजा टीचर की सादगी उनके बैंक बैलेंस और जीवनशैली में भी दिखती है। हलफनामे के अनुसार उनकी कुल नेट वर्थ करीब 61 लाख रुपये है। राजनीति के व्यस्त जीवन के बीच भी उनका पढ़ने-लिखने का शौक कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने ‘इंडियन वर्तमानवुम स्त्री समूहनवुम’ और ‘चीन- राष्ट्रम, राष्ट्रम, काजचाकल’ जैसी किताबें लिखी हैं। ये बातें उनको प्रशंसकों के बीच में और खास बनाती हैं।