जम्मू कश्मीर चुनाव: दूसरे चरण में 15 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित मतदान के पात्र, विशेष पोलिंग बूथ का इंतजाम

चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन ने इस बार चुनाव को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। खासतौर पर, विस्थापित समुदाय के लिए मतदान प्रक्रिया को आसान और सुगम बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
झारखंड विधानसभा की 81 में से 43 सीटों पर चुनाव प्रचार हुआ समाप्त, 13 नवंबर को होगी वोटिंग, 1.37 करोड़ मतदाता करेंगे मतदान
चुनाव - (सोशल मीडिया)
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जम्मू : जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में देश भर से 15,500 से अधिक विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता 25 सितंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। केंद्र शासित प्रदेश के छह जिलों के 26 विधानसभा क्षेत्रों में 25 सितंबर को मतदान होना है, जिसमें 239 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। इन विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाताओं के लिए विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि वे अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभा सकें।

राहत एवं पुनर्वास आयुक्त अरविंद करवानी ने बताया कि कश्मीरी प्रवासी मतदाता जम्मू, उधमपुर और दिल्ली में बनाए गए 24 विशेष मतदान केंद्रों पर मतदान कर सकेंगे। जम्मू में 14,700 से अधिक कश्मीरी पंडित मतदाता पंजीकृत हैं, जो यहां 19 मतदान केंद्रों पर मतदान करेंगे। वहीं दिल्ली में चार मतदान केंद्रों पर 600 से अधिक पंजीकृत मतदाता और उधमपुर में एक मतदान केंद्र पर 350 से अधिक पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

करवानी ने आगे बताया कि जम्मू-कश्मीर के मध्य कश्मीर के श्रीनगर, बडगाम और गांदरबल जिलों के 15 विधानसभा खंडों में भी विस्थापित कश्मीरी पंडित अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह विशेष मतदान व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विस्थापन के बावजूद ये मतदाता चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें और अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकें।

चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन ने इस बार चुनाव को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। खासतौर पर, विस्थापित समुदाय के लिए मतदान प्रक्रिया को आसान और सुगम बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। जम्मू और कश्मीर के चुनाव की इस प्रक्रिया में प्रवासी कश्मीरी पंडितों का मताधिकार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये लोग भी अपनी राजनीतिक आवाज का इस्तेमाल कर रहे हैं और अपने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने में भाग ले रहे हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस बार बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया है। इसके तहत, कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि वे अपने स्थायी निवास से दूर होने के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी तरह भागीदार बन सकें। इस विशेष व्यवस्था के जरिए विस्थापित कश्मीरी पंडितों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। मतदान प्रक्रिया के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके।

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