38% मुस्लिम आबादी के बावजूद... पूर्वोत्तर के चाणक्य' ने पलट दी असम की बाजी, विपक्ष के लिए खतरे का सायरन

Assam Exit Poll: असम के एग्जिट पोल ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। 38% मुस्लिम आबादी वाले राज्य में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी 50% वोट शेयर के करीब पहुंचती दिख रही है।
Despite a 38% Muslim Population... The 'Chanakya of the Northeast' Turns the Tables in Assam A Warning Siren for the Opposition.
हिमंता बिस्वा सरमा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Assam Exit Poll 50 Percent Vote Share: असम की राजनीति को लेकर आए ताजा एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। न्यूज18 वोट वाइब और एक्सिस माई इंडिया के सर्वे ने जो तस्वीरें दिखाई हैं जिसके बाद बड़े-बड़े विशेषज्ञों के दावे पीछे छूटता हुआ दिख रहा है।

इन आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जिन्हें 'पूर्वोत्तर का चाणक्य' कहा जाता है वह असम में एक राजनीतिक चमत्कार करते नजर आ रहे हैं। राज्य में भगवा लहर के साफ संकेत मिल रहे है  जो आने वाले समय में विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।

मोदी का '50 फीसदी' का मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक बार मंत्र दिया था कि भाजपा को केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि 50 फीसदी वोट शेयर हासिल करने के लिए लड़ना चाहिए। हिमंता बिस्वा सरमा असम में प्रधानमंत्री के इसी सपने को हकीकत में बदलते दिख रहे हैं। सर्वे के आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी असम में 50 फीसदी के आसपास वोट शेयर हासिल कर सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पहले ऐसा सोचना भी असंभव या किसी 'पॉलिटिकल फंतासी' जैसा लगता था, लेकिन अब यह हकीकत के धरातल पर उतरता दिख रहा है,।

मुस्लिम आबादी और बदलता सियासी समीकरण

असम की जनसांख्यिकी को देखते हुए ये आंकड़े और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। राज्य में लगभग 38 फीसदी मुस्लिम आबादी है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता रहा है कि इतनी बड़ी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में किसी एक पार्टी के लिए 50 फीसदी वोट शेयर तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है। हालांकि, मौजूदा सर्वे बता रहे हैं कि इस बार कुछ बड़ा बदला है। यह आंकड़ा न केवल भाजपा की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि विपक्ष के लिए एक 'खतरे का सायरन' भी है।

2021 के मुकाबले बड़ी बढ़त के संकेत

अगर हम 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें, तो उस समय मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और उसके सहयोगी दल एआईयूडीएफ (AIUDF) की ओर गया था। इसकी बदौलत कांग्रेस ने लगभग 29.67% वोट शेयर हासिल किया था। ऐतिहासिक रूप से बीजेपी को मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन अपेक्षाकृत कम मिलता रहा है  लेकिन ताजा सर्वे के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि मतदाताओं के व्यवहार में बदलाव आया है।

विपक्ष के लिए आत्ममंथन का समय

हिमंता बिस्वा सरमा ने जिस तरह से असम में बीजेपी के आधार को विस्तार दिया है, उसने विपक्षी दलों को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है। 50 फीसदी वोट शेयर का लक्ष्य प्राप्त करना किसी भी दल के लिए वर्चस्व का प्रतीक होता है। यदि ये एग्जिट पोल नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की पकड़ को और अधिक मजबूत कर देगा।

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