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Tamil Nadu Assembly Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति में कुछ विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां चुनाव केवल एक प्रतिनिधि चुनने के लिए नहीं, बल्कि एक बड़ी विरासत को बचाने के लिए लड़ा जाता है। सलेम जिले की ‘एडप्पादी’ भी उन्हीं में से एक है। यह पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी का गृहक्षेत्र और वह मजबूत किला है जिसने उन्हें राज्य की राजनीति के शिखर तक पहुंचाया।
कावेरी की लहरों से सिंचित इस उपजाऊ जमीन पर इस बार की चुनावी बिसात बेहद दिलचस्प होने वाली है। यहां का मतदाता अपने नेता के प्रति वफादार तो है, लेकिन वह विकास और बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं दिखता है।
एडप्पादी की पहचान एक शुद्ध कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में होती है, जो कावेरी डेल्टा के किनारे सलेम के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। यहां की समतल भूमि और नहरों के जरिए होने वाली सिंचाई ने इसे खेती के लिए एक स्वर्ग बना दिया है। लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था केवल फसलों तक सीमित नहीं है। एडप्पादी अपने फलते-फूलते ‘पावर लूम’ उद्योग, ग्रेनाइट की खदानों और भारी ट्रक परिवहन व्यवसाय के लिए भी देशभर में मशहूर है। पलानीस्वामी साल 2011 से यहां लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं, जिससे यह सीट अब एक ‘पर्सनालिटी-एंकर’ सीट बन चुकी है, जहां नेता का व्यक्तित्व ही सबसे बड़ी ताकत है।
इस क्षेत्र का सामाजिक ढांचा काफी विविधतापूर्ण है। यहां वन्नियार समुदाय के किसान परिवारों की संख्या सबसे अधिक है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इनके अलावा कोंगु क्षेत्र के किसान, दलित बस्तियों के निवासी और कृषि मजदूर भी यहां के मतदाता वर्ग का बड़ा हिस्सा हैं।
महिलाओं के बीच स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच ने पलानीस्वामी के पक्ष में एक मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार किया है। यहाँ का मतदाता स्थिरता और अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता देता है, जो उन्हें लंबे समय से मिलता आ रहा है।
एडप्पादी के लोगों के लिए चुनावी संतुष्टि का सीधा संबंध पानी की उपलब्धता से है। कावेरी नदी का पानी समय पर छोड़ना और नहरों का उचित रखरखाव यहां का सबसे बड़ा मुद्दा रहता है। किसानों के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद केंद्रों की कार्यकुशलता भी काफी मायने रखती है। इसके अलावा, खेती के लिए मुफ्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति, खाद-बीज की लागत पर नियंत्रण और ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग हमेशा बनी रहती है। यहां के बुनकरों और छोटे व्यापारियों के लिए भी बिजली की दरें एक संवेदनशील विषय हैं।
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आने वाले तमिलनाडु चुनाव में एडप्पादी का युवा वर्ग केवल खेती तक सीमित नहीं रहना चाहता। वे कृषि से जुड़े नए उद्योगों और तकनीकी कौशल विकास के अवसरों की तलाश में हैं। युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकता है, जबकि सत्ताधारी खेमा अपनी पुरानी उपलब्धियों और स्थिरता के नाम पर वोट मांगेगा।
यहां के मतदाता प्रदर्शन के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, जिसका अर्थ है कि वे उसी को चुनेंगे जो उनकी गरिमा और योजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करेगा। एडप्पादी का यह महामुकाबला यह तय करेगा कि क्या पलानीस्वामी का यह ‘अजेय’ सफर जारी रहता है या यहां की मिट्टी कोई नई कहानी लिखने को तैयार है।