इचलकरंजी सीट : बागी नेताओं के हाथ लगी महायुति की दुखती रग, जीतने का नहीं कोई भरोसा, जानें क्या है माजरा
आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अब बागी नेता महायुति के लिए सिरदर्द बनते जा रहे है, जहां अब इचलकरंजी विधानसभा क्षेत्र में महायुति के लिए लड़ना और मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि बागी नेता अब उसी मुद्दे को लेकर चुनाव में उतर गए है जो महायुति अभी तक सुलझा नहीं पायी।
- Written By: प्रिया जैस
इचलकरंजी सीट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
कोल्हापुर: इचलकरंजी विधानसभा क्षेत्र को कोल्हापुर जिले में राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जाता है। अनुमान लगाया गया था कि यहां बीजेपी और महाविकास आघाड़ी के बीच दोहरी लड़ाई होगी। लेकिन, निर्दलीय उम्मीदवार और राष्ट्रवादी अजीत पवार गुट के पूर्व शहर अध्यक्ष विठ्ठल चोपडे को हर स्तर से समर्थन मिल रहा है।
ऐसे में शहर के लोग हैरान हैं कि विट्ठल चोपड़े की राजनीतिक ताकत कौन है। निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद उन्होंने प्रचार का मोर्चा संभाल लिया है। ऐसे में अब राहुल आवाडे और चोपडे की टक्कर से लोगों की दिलचस्पी बढ़ गयी है। एनसीपी अजीत पवार गुट के शहर अध्यक्ष विट्ठल चोपडे ने पद से इस्तीफा दे दिया है और सीधे चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं।
हालांकि, उन्होंने अपनी उम्मीदवारी स्वतंत्र रखी है, लेकिन राष्ट्रवादी अजीत पवार गुट के सभी नेता और कार्यकर्ता उनके प्रचार में हैं। इसलिए, शुरुआत में ऐसा माहौल था कि इचलकरंजी बीजेपी और शहर में महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबला होगा। इसके अलावा यह भी अनुमान लगाया गया था कि विट्ठल चोपडे को कुछ ही हजार वोट मिलेंगे।
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उठाया जलसंकट का मुद्दा
लेकिन, विट्ठल चोपड़े को हर स्तर से समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा उन्होंने इचलकरंजी के जल संकट का मुद्दा भी उठाया है। पिछले 40 वर्षों से इचलकरंजीकरों ने आवाडे को चुना है लेकिन वे इचलकरंजी की पानी की समस्या का समाधान नहीं कर पाए हैं।
विठ्ठल चोपडे लगातार इस मुद्दे को उठा रहे है। उनके मुद्दे को लोग पसंद भी कर रहे है। इसलिए, कार्यकर्ताओं ने भी विठ्ठल चोपडे के पीछे खड़े होने का मन बना लिया है। हाल ही में लायंस क्लब में हुई बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई है। जब कोई बड़ा नेता मंच पर नहीं था तो दूसरे स्तर के कार्यकर्ताओं ने सभा में जमकर धमाल मचाया।
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अल्पसंख्यकों की बढ़ी परेशानी
इसके अलावा मतदाताओं के मन में यह भी सवाल है कि इचलकरंजी में अल्पसंख्यक समुदाय किसके पक्ष में है। देखा जाए तो अल्पसंख्यक समुदाय बीजेपी विरोधी है। आवाडे के अल्पसंख्यक समुदाय से अच्छे संबंध हैं। चूंकि वे भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए अल्पसंख्यक समुदाय दुविधा में है।
वरिष्ठ स्तर से अल्पसंख्यक समुदाय, महाविकास आघाड़ी को सहयोग करने के निर्देश दे रहे हैं। दरअसल, महाविकास आघाड़ी को बढ़ावा देने में अल्पसंख्यक समुदाय सबसे आगे है। हालांकि, इचलकरंजी अलग रुख अपनाने के मूड में दिख रहे हैं। समुदाय स्तर पर जल्द ही ऐसा निर्णय होने की संभावना है।
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