तमिलनाडु चुनाव: चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट पर होगी कांटे की टक्कर! क्या उदयनिधि दोहराएंगे करुणानिधि वाला करिश्मा?
Chepauk Thiruvallikeni Seat Profile: चेन्नई की हाई-प्रोफाइल चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट पर चुनावी हलचल तेज है। करुणानिधि की विरासत और उदयनिधि स्टालिन की साख दांव पर है। जानिए क्या है इस सीट का इतिहास।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- नवभारत डिजाइन
Tamil Nadu Assembly Election 2026: चेन्नई के मध्य में स्थित ‘चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी’ महज एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता और संस्कृति का धड़कता हुआ दिल है। यहां की गलियों में एक तरफ प्राचीन पार्थसारथी मंदिर की घंटियां गूंजती हैं, तो दूसरी तरफ चेपॉक स्टेडियम में क्रिकेट का रोमांच चरम पर होता है।
आगामी अप्रैल महीने में होने वाले मतदान के लिए यहां की सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के लिए यह चुनाव उनकी लोकप्रियता की असली अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है। ऐतिहासिक महत्व और सघन आबादी वाले इस क्षेत्र में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों और दशकों पुरानी समस्याओं के बीच भी है।
जानिए चेपॉक का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर
चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी का इतिहास तमिलनाडु के दिग्गज नेताओं की कहानियों से भरा पड़ा है। द्रविड़ राजनीति के भीष्म पितामह एम. करुणानिधि ने यहां से तीन बार जीत दर्ज कर इस क्षेत्र को डीएमके का अभेद्य किला बना दिया था। साल 2021 के चुनावों में उदयनिधि स्टालिन ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए 93,285 वोट हासिल किया और करीब 69,355 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
उन्होंने पीएमके के कसाली ए.वी.ए. को करारी शिकस्त दी थी। आज यह निर्वाचन क्षेत्र केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि राज्य के सचिवालय और विधान सभा जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं का घर होने के कारण बेहद रसूखदार माना जाता है।
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क्या बुनियादी मुद्दों पर मचेगा घमासान?
भले ही यह क्षेत्र वीआईपी माना जाता हो, लेकिन यहां का आम नागरिक आज भी कई बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा है। मरीना बीच के करीब होने के कारण मानसून के दौरान यहां भयंकर जलजमाव की समस्या पैदा हो जाती है, जो जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। संकरी गलियों में स्थित पुराने और जर्जर मकान न केवल रिहायश के लिए असुरक्षित हैं, बल्कि आग लगने जैसी दुर्घटनाओं के प्रति भी संवेदनशील हैं।
यहां के मतदाताओं के लिए साफ पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दे चुनावी फैसलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सघन बस्तियों में नागरिक सुविधाओं को आधुनिक बनाने की है।
2026 की जंग में किसका पलड़ा भारी?
2026 का चुनाव पिछले चुनावों के मुकाबले काफी अलग होने की उम्मीद है क्योंकि इसमें नए सियासी खिलाड़ी मैदान में उतर रहे हैं। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने अकेले चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है, जो युवा वोटों में सेंध लगा सकती है।
दूसरी ओर, कमल हासन की पार्टी एमएनएम ने डीएमके गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे उदयनिधि की स्थिति मजबूत दिख रही है। विपक्षी दल एआईएडीएमके ने भी मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और रेफ्रिजरेटर जैसे लोकलुभावन वादों के साथ अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। ऐसे में चेपॉक की विविध आबादी- जिसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय मिल-जुलकर रहते हैं। अब किसके दावों पर मुहर लगाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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2021 का वोट शेयर क्या था?
पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो डीएमके ने यहां 67.9% वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की थी। हालांकि, राजनीति में समय के साथ समीकरण बदलते रहते हैं। 2016 में जे. अन्बझगन ने एडीएमके को करीब 14,000 वोटों से हराया था, जो बताता है कि यहां जीत का अंतर समय के साथ बढ़ता गया है।
