NDA में 'ऑल इज वेल' नहीं? बराबर सीटों से नीतीश नाराज, बिना लिस्ट जारी किए ही बांट रहे सिंबल

Bihar एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान तो हो गया, लेकिन अब अंदरखाने की कलह खुलकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से सब कुछ नहीं न लगने के संकेतों के साथ पहली लिस्ट जारी हो गई है।
bihar-nda-seat-sharing-nitish-kumar-unhappy-with-jdu-bjp-equal-seats-no-candidate-list-yet
बराबर सीटों से नीतीश की नाराजगी की खबरें (फोटो- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Nitish Kumar Unhappy to NDA: बिहार एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान तो हो गया, लेकिन अब अंदरखाने की कलह खुलकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खेमे में सब कुछ ठीक नहीं लग रहा। पहली बार भाजपा के बराबर 101 सीटों पर लड़ने और चिराग पासवान की पार्टी को 29 सीटें दिए जाने के फैसले से नीतीश कुमार की नाराजगी की खबरें सियासी गलियारों में तैर रही हैं। इस नाराजगी का आलम यह है कि जेडीयू ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची भी जारी नहीं की है।

इस खींचतान का सबसे बड़ा सबूत यह है कि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा समेत ललन सिंह और बिजेंद्र यादव जैसे बड़े नेता बिना किसी औपचारिक सूची के ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। पार्टी अपने भरोसेमंद चेहरों को सीधे सिंबल थमा दे रही है, लेकिन सूची का इंतजार लंबा होता जा रहा है। हालांकि, जेडीयू नेता संजय झा ने भरोसा दिलाया है कि बुधवार दोपहर तक सूची जारी कर दी जाएगी, लेकिन बैठकों का दौर और नेताओं की चुप्पी कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। हालांकि पार्टी के द्वारा पहली 57 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई है।

दिल्ली से पटना तक बैठकों का दौर

कहा जा रहा है कि सीट बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के वार्ताकारों, संजय झा और ललन सिंह पर नाराजगी जाहिर की है। मामला बिगड़ता देख अब भाजपा भी सक्रिय हो गई है। नीतीश कुमार को मनाने की कोशिशों के तहत दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है। उपेंद्र कुशवाहा आज दिल्ली पहुंच रहे हैं, जबकि चिराग पासवान पहले से ही वहां मौजूद हैं। इन मुलाकातों के बाद खुद गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को तीन दिनों के लिए पटना पहुंचेंगे, ताकि पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर से पहले सारे मतभेद सुलझा लिए जाएं।

नेताओं में बेचैनी, छिन सकती है सीट

भले ही एनडीए के नेता "ऑल इज वेल" का दावा कर रहे हों, लेकिन जेडीयू के कई मौजूदा विधायकों और नेताओं में बेचैनी साफ दिख रही है। उन्हें डर है कि बराबर सीटों के फॉर्मूले के तहत उनकी सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। एक वरिष्ठ जेडीयू नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के फैसलों में कुछ अन्य नेताओं के बढ़ते दखल और नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर भी पार्टी के भीतर असहजता का माहौल है, जिससे यह संकट और गहरा गया है।

Navbharat Live
navbharatlive.com