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Bhawanipore Roadshow Clash: कोलकाता का भवानीपुर इलाका आज केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि एक युद्ध के मैदान जैसा नजर आने लगा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस गढ़ में आज जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का रोड शो निकला, तो हवा में उत्साह से ज्यादा तनाव महसूस किया जा रहा था। जैसे-जैसे भाजपा का यह काफिला आगे बढ़ा, राजनीति की कड़वाहट सड़कों पर साफ दिखाई देने लगी।
लोकतंत्र में जहां शांतिपूर्ण चुनाव प्रचार की उम्मीद की जाती है, वहां आज केवल नफरत और टकराव का मंजर दिखाई दे रहा था। इस रोड शो ने बंगाल की राजनीति में उस कड़वाहट को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जो चुनाव के नजदीक आते ही अक्सर सतह पर आ जाती है।
इस पूरे ड्रामे का सबसे संवेदनशील मोड़ तब आया जब भाजपा का विशाल काफिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी आवास के सामने से गुजरने लगा। जैसे ही सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह की गाड़ियां उस गली के करीब पहुंचीं, वहां पहले से ही बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद थे।
दोनों पक्षों के बीच केवल कुछ ही मीटर की दूरी थी और देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। एक आम राहगीर के लिए उस समय वहां से गुजरना भी मुश्किल हो गया था, क्योंकि पुलिस के भारी घेरे के बावजूद दोनों तरफ के कार्यकर्ता एक-दूसरे के बेहद करीब पहुंच गए थे। यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकती थी, लेकिन नारेबाजी का दौर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा था।
राजनीतिक मर्यादाएं उस समय पूरी तरह तार-तार हो गईं जब विरोध प्रदर्शन ने बेहद अभद्र रूप ले लिया। चश्मदीदों के अनुसार, जब भाजपा का काफिला वहां से निकला, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर चप्पलें दिखाईं, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई।
इतना ही नहीं, विरोध के नाम पर मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए कुछ लोगों को पार्टी के झंडों पर थूकते हुए भी देखा गया। टीएमसी कार्यकर्ताओं के पास लाठियां भी दिखाई दीं। इस हरकत ने भाजपा कार्यकर्ताओं के गुस्से में आग में घी डालने का काम किया और देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच हल्की फुल्की धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
हंगामे के बीच अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के समर्थन में जहां एक तरफ ‘जय श्री राम’ के नारे लग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ से तृणमूल समर्थक अपनी पार्टी के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे थे। इस रोड शो ने यह साफ कर दिया है कि भवानीपुर की लड़ाई अब केवल वोटों की नहीं, बल्कि वर्चस्व और अहंकार की लड़ाई बन चुकी है। आम जनता के मन में अब यही डर है कि अगर नामांकन और रोड शो के दौरान ऐसा माहौल है, तो मतदान के दिन सुरक्षा की क्या स्थिति होगी।
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कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों के लिए आज का दिन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा। ममता बनर्जी के घर के पास के इस संवेदनशील इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था, लेकिन राजनीतिक जुनून के आगे सुरक्षा के इंतजाम भी बौने नजर आए। जिस तरह से झंडों का अनादर किया गया और व्यक्तिगत हमले किए गए, उसने आगामी चुनाव के हिंसक होने के संकेतों को और गहरा कर दिया है।