महाराष्ट्र चुनाव: महायुति को लेकर अजित पवार का बढ़ा आत्मविश्वास, इतनी सीटों पर जीतने का कर दिया दावा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए एनसीपी (अजित पवार) पार्टी के नेता अजित पवार को चुनावी प्रचार के दौरान जनता का भारी प्रतिसाद मिल रहा है। जिस पर अब अजित पवार का बारामती विधानसभा क्षेत्र से जीतने का विश्वास प्रबल हो गया है।
महाराष्ट्र चुनाव से पहले एनसीपी के अजित पवार
अजित पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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बारामती: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार अभियान जोरों पर है। इस बीच सभी राजनीतिक दलों के नेता ने अजित पवार ने जनता पर भरोसा दिखाया। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 175 से अधिक सीटों के साथ महायुति गठबंधन की जीत पर भरोसा जताया है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और बारामती विधानसभा क्षेत्र से एनसीपी उम्मीदवार ने कहा, "महायुति को 175 से अधिक सीटें मिलेंगी और बारामती में मैं एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीतूंगा।" महाराष्ट्र में 20 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को मतों की गिनती होगी।

बारामती में विधायक

अजित पवार ने बारामती का दौरा किया, जहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को संबोधित किया। बारामती विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक रहे पवार अपने भतीजे युगेंद्र पवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जो विधानसभा चुनाव में अपना पहला चुनावी अभियान चला रहे हैं।

महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल हैं। इसका मुकाबला महाविकास अघाड़ी (एमवीए) से है, जिसमें कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं।

नागपुर में देवेंद्र फडणवीस की रैली

इससे पहले आज महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि वे "रजाकारों" के वंशज हैं, जिन्होंने मराठवाड़ा के लोगों पर अत्याचार किया।

आज नागपुर में अपनी चुनावी रैली के दौरान मीडियाकर्मियों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा, "वे 'रजाकारों' के वंशज हैं। 'रजाकारों' ने मराठवाड़ा के लोगों पर अत्याचार किया, उनकी जमीनें लूटीं, महिलाओं की अस्मत लूटने की कोशिश की और परिवारों को बर्बाद कर दिया। वे हमसे किस मुंह से बात कर सकते हैं?"

गौरतलब है कि रजाकर एक अरबी शब्द है जिसका मतलब स्वयंसेवक होता है। इसे बांग्लादेश में अपमानजनक माना जाता है क्योंकि यह उन लोगों को दर्शाता है जिन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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