सीमा मलिक, फोटो - सोशल मीडिया
नई दिल्ली : बीते 25 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में एक बड़ा हंगामा हुआ, जब विधानसभा के अंदर जय भीम के नारे लगाने को लेकर आप विधायकों को निलंबित कर दिया गया। यह घटना तब हुई जब उपराज्यपाल ने अपना संबोधन शुरू किया और आप विधायक जैसे ही जय भीम के नारे लगाने लगे, तो सदन में अराजकता फैल गई। इसके बाद स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आप के विधायकों को निलंबित कर दिया।
निलंबन के बाद, इन विधायकों ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और बाबासाहेब आंबेडकर के पोस्टर लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस घटनाक्रम को लेकर एनसीपी (एसपी) प्रवक्ता सीमा मलिक ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने कहा, “अगर आज भी लोकतंत्र में लोगों को जय भीम कहने से रोका जाता है, तो यह बहुत दुखद है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।” मलिक ने आगे आरोप लगाया कि सरकार दलित विरोधी और आंबेडकर विरोधी” है, क्योंकि पहले भी अंबेडकर की तस्वीर हटा दी गई थी।
सीमा मलिक ने यह भी कहा, “आंबेडकर की विरासत का सम्मान सिर्फ उनके विचारों को अपनाने में है, न कि केवल मूर्तियां लगाने या उपाधियां देने में।” उन्होंने राज्य सरकार के कार्यों पर सवाल उठाए और कहा कि असल में उन्हें अंबेडकर की सोच को सच्चे रूप से मानना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए उनका उपयोग करना चाहिए।
इस घटना पर भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने प्रतिक्रिया दी और कहा, “अगर विपक्ष शोर मचाता है, तो यह स्वीकार्य नहीं है, खासकर जब राष्ट्रपति या उपराज्यपाल अपना संबोधन दे रहे हों। यह बहुत बड़ा अपराध है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में विपक्ष ऐसा नहीं करेगा।
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इस घटना के बाद विधानसभा में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। विधायकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने के बावजूद, यह घटनाक्रम लोकतंत्र और विरोध की स्वतंत्रता के बीच एक अहम सवाल खड़ा करता है।