

PM Modi News : जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर माथापच्ची कर रही है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ मिलकर भारत और यूरोप के रिश्तों में एक इंटेलिजेंट मोड़ ला दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो तस्वीरों के साथ पीएम मोदी ने इस मुलाकात को केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भारत-यूरोप के बीच एक सुनहरे दौर की आहट बताया है।
पीएम मोदी ने फिनलैंड के पीएम को विशेष रूप से भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में उनकी व्यक्तिगत मदद के लिए शुक्रिया कहा। मगर, बात सिर्फ पुराने व्यापार की नहीं थी; दोनों नेताओं का विजन अब व्यापार को दोगुना करने का है।
6G टेक्नोलॉजी : दुनिया अभी 5G को ठीक से समझ ही रही है कि मोदी और ओर्पो ने 6G की नींव पर बात शुरू कर दी।
क्लीन एनर्जी और बायोफ्यूल : सस्टेनेबल भविष्य के लिए कचरे से कंचन बनाने पर जोर दिया गया।
एथिकल AI : एआई केवल स्मार्ट न हो, बल्कि नैतिक भी हो, इस पर दोनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के क्षेत्र में फिनलैंड की बढ़ती ताकत की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिनलैंड के पास इनोवेशन है तो भारत के पास वो ग्लोबल टैलेंट है, जो इस द्विपक्षीय सहयोग को रॉकेट की रफ्तार दे सकता है। दोनों नेताओं ने मिलकर जिम्मेदार और टैलेंट-ड्रिवन एआई का संकल्प लिया, जो केवल मुनाफा नहीं बल्कि मानव कल्याण के लिए काम करे।
यह मुलाकात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बैकड्रॉप में हुई है। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह 5 दिवसीय महासम्मेलन किसी टेक-कुंभ से कम नहीं है। इसमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और दुनिया भर के 500 से ज्यादा टेक-दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं। 16 फरवरी की शाम पीएम मोदी ने खुद इस समिट के एक्सपो का उद्घाटन किया था। वहां उन्होंने स्टार्टअप्स के स्टालों को देखकर यह संदेश दिया कि भारत अब केवल एआई का यूजर नहीं, बल्कि मेकर बनने की राह पर है।
इस समिट का असली मकसद एआई को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर उसे सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और समावेशी विकास के लिए इस्तेमाल करना है। प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप्स की प्रगति को देखकर भरोसा जताया है कि भारत एआई के मोर्चे पर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। कुल मिलाकर पेटेरी ओर्पो और पीएम मोदी की यह लंबी बातचीत संकेत है कि आने वाले समय में भारत और फिनलैंड की दोस्ती आर्टिफिशियल नहीं, बल्कि पूरी तरह रियल और सस्टेनेबल होने वाली है।