

Sonia Gandhi Voter List Controversy: वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने को लेकर Sonia Gandhi के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर शनिवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने सोनिया गांधी के वकील को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से सभी दलीलें पेश की जा चुकी हैं और उन्होंने चुनाव आयोग की एक रिपोर्ट अदालत में पेश करने की अनुमति भी मांगी है। सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी के वकील ने कहा कि वे अपने मुवक्किल के पक्ष में कुछ अहम सबूत पेश करना चाहते हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी ने भारत की नागरिकता मिलने से पहले ही गलत तरीके से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लिया था। इससे पहले 30 मार्च को मामले की आंशिक सुनवाई हुई थी, जिसके बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। उस समय अदालत ने कहा था कि 18 अप्रैल को बचाव पक्ष अपनी दलीलें रखेगा।
यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है, जिनकी मांग है कि इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। मामले के अनुसार, आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में ही मतदाता सूची में शामिल हो गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में मिली।
दावा किया गया है कि 1980 में नाम जुड़ने के बाद 1982 में इसे हटा दिया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि 1980 में उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उस समय कथित तौर पर फर्जीवाड़ा और राजनीतिक प्रभाव के चलते उनका नाम पहले ही जोड़ दिया गया था।