महिला आरक्षण में 30 महीने की देरी क्यों? सोनिया बोलीं मोदी नहीं चाहते जाति जनगणना, बताई सरकार की असली मंशा

Women Reservation Bill: Sonia Gandhi ने सोमवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसद के विशेष सत्र में बिल लाने के पीछे असली मकसद महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है।
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सोनिया गांधी, PM मोदी
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Sonia Gandhi on Women Reservation Bill: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष Sonia Gandhi ने सोमवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसद के विशेष सत्र में बिल लाने के पीछे असली मकसद महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) है। उनके मुताबिक, प्रस्तावित परिसीमन न केवल खतरनाक है बल्कि संविधान की भावना के खिलाफ भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा कोई भी परिसीमन सिर्फ गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए।

सरकार की मंशा पर सवाल

‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में Sonia Gandhi ने आरोप लगाया कि Narendra Modi सरकार का असली उद्देश्य जाति जनगणना को और टालना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे समय में विशेष सत्र बुला रही है जब Tamil Nadu और West Bengal में चुनावी अभियान चरम पर हैं, जिससे विपक्ष पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जल्दबाजी राजनीतिक लाभ लेने और विपक्ष को असहज स्थिति में डालने के लिए है।

महिला आरक्षण कानून का जिक्र

Sonia Gandhi ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसके तहत संविधान में अनुच्छेद 334-A जोड़ा गया। इसमें लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद लागू किया जाना तय किया गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता था कि यह आरक्षण 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू हो, जिसकी मांग Mallikarjun Kharge ने भी की थी, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई।

प्रधानमंत्री से सीधे सवाल

Sonia Gandhi ने सवाल उठाया कि अब अगर सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करने के लिए संशोधन लाना चाहती है, तो इस फैसले में 30 महीने की देरी क्यों हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार कुछ हफ्ते इंतजार कर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला सकती थी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने तीन बार पत्र लिखकर 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

जनगणना में देरी पर भी निशाना

गांधी ने आरोप लगाया कि 2021 में होने वाली जनगणना को लगातार टाला गया, जिससे करोड़ों लोग योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि अब 2027 की जनगणना को डिजिटल बताया जा रहा है, लेकिन इसके आंकड़े भी देर से आने की बात कही जा रही है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार पहले जाति जनगणना के खिलाफ थी, लेकिन बाद में इसकी घोषणा की गई। उनके मुताबिक, यह विरोधाभासी रुख सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

गांधी ने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र के एजेंडे पर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता की कमी और राजनीतिक रणनीति का संकेत देती है।

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