दिल्ली ब्लास्ट में बच्चों का डॉक्टर भी शामिल, डॉ. मुजफ्फर अगस्त में गया था अफगानिस्तान, कई और खुलासे

Delhi Blast Live Updates: पुलिस हिरासत में मौजूद आदिल अहमद राठर का बड़ा भाई मुजफ्फर अहमद राठर की भी दिल्ली ब्लास्ट में भूमिका सामने आ रही है। पुलिस इसके पूरे परिवार की कुंडली खंगाल रही है।
Pediatrician Muzaffar Ahmed Rathar was also involved in the Delhi blasts
दिल्ली लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट की तस्वीर। इमेज-सोशल मीडिया।
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Delhi Blast Investigation Updates: दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में जुटी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) अब एक-एक कर पूरी कड़ी जोड़ती जा रही है। एनआईए को पता चला है कि कश्मीर आतंकी मॉड्यूल का एक अहम सदस्य अगस्त में गुपचुप तरीके से अफगानिस्तान भाग गया था। उसका नाम 33 वर्षीय बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशन) मुजफ्फर अहमद राठर है, जो गिरफ्तार 31 वर्षीय डॉ. आदिल अहमद राठरका बड़ा भाई है।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, मुजफ्फर अहमद राठर को कश्मीर के आतंकी सेल और अफगानिस्तान में मौजूद जिहादियों के बीच बम बनाने और हमले की तकनीक पर तालमेल बैठाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

देश छोड़ने से पहले श्रीनगर में रहता था मुजफ्फर

मुजफ्फर देश छोड़ने से पहले श्रीनगर में रहता था। डॉ. अदील को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया था। डॉ. आदिल इस आतंकी सेल का कमांडर है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि जांच में अदील के एक लॉकर से कलाश्निकोव राइफल और गोलियां बरामद की गईं। यह जांच फरीदाबाद स्थित अल-फलाह अस्पताल के डॉक्टरों से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ चल रही है। उसी अस्पताल का डॉक्टर उमर उन नबी फरीदाबाद में हुई हालिया छापेमारी के बाद सफेद i20 कार में भागने की कोशिश कर रहा था। कार में वह विस्फोटक सामग्री लेकर जा रहा था, जो यह मॉड्यूल इकट्ठा कर रहा था। सोमवार को उसकी कार फटी तो वह मारा गया। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस धमाके में कुल 13 लोग मारे गए।

2022 में उमर उन नबी के साथ गया था तुर्की

एक खुफिया अधिकारी के अनुसार मुजफ्फर के अफगानिस्तान जाने के बाद कुछ अहम जानकारी सामने आई है। वह पहले दुबई गया और परिवार से कहा कि वह सच्चे इस्लामी समाज और स्टेट की सेवा करना चाहता है। अधिकारी ने बताया कि मुजफ्फर, अल-फलाह मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर मुज़म्मिल अहमद गनी और साथी उमर उन नबी के साथ मार्च 2022 में तुर्की गया था। तब तीनों ने अफगानिस्तान पहुंचकर सैन्य प्रशिक्षण लेने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हुए थे।

अब ऑनलाइन दी जा ही आतंक की ट्रेनिंग

पिछले कुछ वर्षों में खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी संगठन अब ऑनलाइन नए सदस्यों को ट्रेनिंग देते हैं। उन्हें लड़ाई की बुनियादी तकनीक, आईईडी (बम) बनाना और हथियार चलाना सिखाते हैं। खुफिया अधिकारी ने कहा कि अभी कुछ निश्चित कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन मेरा मानना है कि 2022 में अफगानिस्तान न पहुंचने की नाकामी इन लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक मोड़ साबित हुई। जब वे हिजरत यानी भारत छोड़कर किसी इस्लामी देश नहीं जा सके तो उनके दिमाग में रहा कि अब उन्हें उसी देश के खिलाफ जिहाद छेड़ना है, जिसमें वे खुद को सताया हुआ मानते हैं। एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि मुजफ्फर का अफगानिस्तान जाना ये दिखाता है कि बम धमाकों की योजना आखिरी चरण में पहुंच चुकी थी।

मौलवी इरफान अहमद ने जिहादी कमांडरों से मिलवाया

सूत्रों के मुताबिक कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद ने कश्मीरी डॉक्टरों को अफगानिस्तान के कुनार में जिहादी कमांडरों से मिलवाया। उसने डॉक्टरों को हमले के हथियार उपलब्ध कराए, जो पहले नदीम मुज़फ्फर ने छिपाए थे। नदीम की 2018 में मौत हो गई थी।

डॉ. शाहीन सईद की निजी बचत से विदेश यात्रा और बम बनाने के उपकरण आए

जांचकर्ताओं के अनुसार विदेश यात्रा और बम बनाने के उपकरणों के लिए अधिकतर फंड लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद की निजी बचत से आया। दक्षिण अफगानिस्तान के इस अस्थिर माहौल में कई कश्मीरी जिहादी अलग-अलग संगठनों को चला रहे हैं। 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रिपोर्ट में बताया था कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद वहां तालिबान के लिए ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं। पूर्व श्रीनगर निवासी शेख सज्जाद गुल को द रेसिस्टेंस फ्रंट नाम के लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन की गतिविधियां संभालने वाला माना जाता है। कश्मीर के अनुभवी जिहादी कारी रमजान जैश-ए-मोहम्मद के अफगान ऑपरेशंस चला रहे हैं।

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