कल विधानसभा में प्रस्ताव लाएंगे मोहन सिंह बिष्ट, दिल्ली के मुस्तफाबाद का बदल जाएगा नाम; जानिए क्या हो सकता है नया नाम?
ध्यान देने वाली बात यह है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मोहन सिंह बिष्ट ने वादा किया था कि यदि जनता उन्हें फिर से विधायक बनाएगी, तो वे मुस्तफाबाद का नाम बदलवाने का प्रयास करेंगे।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
मोहन सिंह बिष्ट, फोटो - सोशल मीडिया
नई दिल्ली : दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुस्तफाबाद से भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट विधानसभा में इसके लिए प्रस्ताव पेश करने वाले हैं। शुक्रवार (28 मार्च) को बिष्ट सदन में इस प्रस्ताव को लेकर अपनी बात रखने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र का नाम बदलकर शिवपुरी या शिवविहार रखा जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मोहन सिंह बिष्ट ने वादा किया था कि यदि जनता उन्हें फिर से विधायक बनाएगी, तो वे मुस्तफाबाद का नाम बदलवाने का प्रयास करेंगे। अब विधायक बनने के बाद वह अपने चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
नाम बदलने की वजह क्या है?
मोहन सिंह बिष्ट का कहना है कि उन्होंने इस क्षेत्र में जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास कार्य किए हैं। उनका दावा है कि वे 1998 से 2008 तक इस क्षेत्र के विधायक रहे हैं और इलाके की समस्याओं को बखूबी समझते हैं। नाम बदलने के सवाल पर बिष्ट ने कहा था कि क्षेत्र में 58 फीसदी लोग एक समुदाय के हैं, जबकि 42 फीसदी दूसरे समुदाय के। ऐसे में पहले बहुसंख्यक लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले 58 फीसदी लोगों की बात सुनी जानी चाहिए। यही वजह है कि वे इलाके का नाम बदलकर शिवपुरी या शिवविहार करना चाहते हैं।
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मुस्तफाबाद का राजनीतिक और सामाजिक महत्व
मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में 40 से 42 फीसदी मुस्लिम आबादी है। साल 2020 के दिल्ली दंगों में यह इलाका भी हिंसा से प्रभावित हुआ था। उस समय मुस्तफाबाद का नाम काफी चर्चा में आया था। मोहन सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। साल 1998 में करावल नगर सीट से विधायक चुने गए थे और 2015 तक विधायक रहे। हालांकि, 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के कपिल मिश्रा ने उन्हें हराया था। लेकिन, बाद में 2020 में दुर्गेश पाठक को शिकस्त देकर बिष्ट ने दोबारा विधानसभा में वापसी की।
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नाम बदलने का असर?
अगर मुस्तफाबाद का नाम बदलकर शिवपुरी या शिवविहार रखा जाता है, तो इसका असर स्थानीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। यह फैसला बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे को बल दे सकता है, जिससे आगामी चुनावों में पार्टी को फायदा मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि विधानसभा में पेश होने वाला यह प्रस्ताव पारित होता है या नहीं।
