देर से शादी रेप का कारण...रशीदी के बयान पर भड़के महिला आयोग और VHP, बवाल के बाद मौलाना ने दी सफाई

Sajid Rashidi Controversial Statement: शादी की उम्र पर विवादित बयान के बाद मौलाना साजिद रशीदी ने सफाई दी है। महिला आयोग, VHP समेत कई संगठनों ने बयान की कड़ी निंदा की है।
Late marriage a cause for rape... Women's Commission and VHP lash out at Rashidi's statement; Maulana issues clarification following the uproar.
मौलाना साजिद रशीदी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Maulana Sajid Rashidi Marriage Age Controversy: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने महिलाओं की शादी को लेकर दिए एक विवादित बयान पर घिर गए हैं। महिलाओं की शादी की उम्र को लेकर दिए गए उनके बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। महिला आयोग, भाजपा और विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनो ने उनके इस बयान की कड़ी निंदा की है। देशभर से आ रही प्रतिक्रिया पर अब मौलाना ने सफाई दी है।

सफाई देते हुए मौलाना ने कहा कि मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं जहां ऐसे कानून लाए जा सकते हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी कर सके और जहां एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सके।

राज्य महिला आयोग ने की कड़ी निंदा

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह एक संकीर्ण और महिला विरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा, आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं और महिलाओं को पुरुषों के बराबर लाना चाहते हैं, क्योंकि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं।

VHP के प्रवक्ता ने मौलाना को बताया कट्टर

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी मौलाना के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर और संकीर्ण मानसिकता को दिखाता है। भारत में सभी महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं और ऐसे बयान देने वाले धार्मिक नेताओं को महिलाओं से तुरंत माफी मांगनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से इस मामले में कार्रवाई की मांग भी की।

बयान को राजनीतिक रंग देने का आरोप

'लड़कियों की देर से शादी रेप का कारण बनती है' वाले बयान पर सफाई देते हुए मौलाना ने कहा कि मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं जहां ऐसे कानून लाए जा सकते हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी कर सके और जहां एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सके।

आगे उन्होंने कहा कि ऐसे कानूनों वाले देश में अगर कोई रेप या किसी बुरी घटना के डर से लड़की की जल्दी शादी करने का सुझाव देता है तो यह पक्का एक राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा। लोग इसका गलत मतलब निकालेंगे और ये लोग कौन हैं? मेरा बस यही कहना है कि किसी भी धर्म में अगर अच्छी बात है तो उसे अपनाने में क्या बुराई है? मेरे बयान को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और कौन दे रहा है?

असम, बिहार का दिया उदाहरण

इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए। मैं 6 या 7 राज्यों के नाम ले सकता हूँ जैसे झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जहां आज भी बाल विवाह होता है। माता-पिता अक्सर कम उम्र में ही बिना पढ़ी-लिखी बेटियों की शादी कर देते हैं। समाज में यह सब हो रहा है।

इस्लाम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम भी यही सलाह देता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए। मैंने ऐसा क्या गलत कह दिया जिससे इतना बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम से विवाद की शुरुआत होती है। कार्यक्रम के दौरान मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, देर से शादी होने की वजह से रेप की घटनाएं हो रही हैं। अगर अपनी बेटियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उनकी शादी जल्दी कर दीजिए। उनके इस बयान के सामने आने के बाद से ही देशभर में विवाद शुरू हो गया।

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