आरक्षण और UGC नियमों के खिलाफ जंतर-मंतर पहुंचे हजारों लोग, उठी आर्थिक आधार पर बदलाव की मांग

Reservation Protest: जंतर-मंतर पर हजारों लोगों ने आरक्षण व्यवस्था और UGC इक्विटी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक आधार पर मदद, क्रीमी लेयर और नीतियों की समीक्षा की मांग की।
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Jantar Mantar Reservation Protest: 45 दिनों तक चले 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हजारों प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर जंतर-मंतर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।

प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना था कि सरकारी सहायता और आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। कई प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक स्थिति को सहायता और आरक्षण का आधार बनाने की मांग की।

SC/ST एक्ट के खिलाफ भी उठी आवाज

प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने SC/ST एक्ट को लेकर भी विरोध जताया और इसके प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी भी कानून का गलत इस्तेमाल किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं होना चाहिए और सरकार को दुरुपयोग रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए।

UGC इक्विटी नियमों को लेकर भी प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने अब स्थगित किए जा चुके UGC इक्विटी नियमों को लेकर भी नारेबाजी की। उनका आरोप था कि इस तरह के नियम छात्रों के बीच भेदभाव और द्वेष को बढ़ावा दे सकते हैं।

भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय सचिव सुधीर चौहान ने कहा कि UGC के नए नियम वापस लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे नियम छात्रों के बीच भेदभाव और आपसी द्वेष पैदा कर सकते हैं।

'जाति नहीं, आर्थिक स्थिति बने मदद का आधार'

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय सचिव (युवा) दीपराज रावल ने कहा कि सरकार को यह तय करने में आर्थिक स्थिति को आधार बनाना चाहिए कि किसे सरकारी मदद की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि गरीब व्यक्ति चाहे किसी भी जाति से हो, उसे शिक्षा, कोचिंग और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए सहायता मिलनी चाहिए।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि कई बार इसका लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता, जो वास्तव में सबसे ज्यादा वंचित हैं। सरकार को यह आकलन करना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था अपने उद्देश्य को कितना पूरा कर रही है और इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है या नहीं।

'क्रीमी लेयर' व्यवस्था लागू करने की मांग

प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का प्रावधान लागू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा SC, ST और OBC से जुड़ी नीतियों की समीक्षा की मांग की गई।

प्रदर्शनकारी यूएस राणा ने कहा कि उनकी मांग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी सहायता से वंचित करने की नहीं है, बल्कि मदद को वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने की है। उन्होंने स्कॉलरशिप, फीस में सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाएं आर्थिक जरूरत के आधार पर देने की बात कही।

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'कई दशकों बाद आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा जरूरी'

प्रदर्शन में शामिल नितिन चौहान ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था लागू हुए कई दशक हो चुके हैं और बदलती सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अब इसकी समीक्षा पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में परिस्थितियां काफी बदली हैं। ऐसे में यह विचार किया जाना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था में किस तरह के बदलाव की जरूरत है और आर्थिक पिछड़ेपन को बिना किसी भेदभाव के किस तरह दूर किया जा सकता है।

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