सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिप सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगाई। न्यायपालिका की छवि और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया।
Supreme Court Live Streaming Ban
सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court Live Streaming Ban: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश पारित किया। अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसके वीडियो प्रसारित किए जाने पर रोक की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने  अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के कुछ हिस्सों को काटकर सोशल मीडिया पर सोशल मीडिया पर डालने और न्यायपालिका की छवि खराब करने पर कड़ी नाराजगी जताई।  सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालती कार्यवाही के किसी भी क्लिप के प्रसारित करने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। हालांकि इस दौरान वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत से कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर लाइवस्ट्रीमिंग से कोई समस्या नहीं दिखती है।

अदालती कार्यवाही का बनाया जा रहा मजाक

हालांकि, विकास सिंह ने कोर्ट में जस्टिस केवी विश्वनाथन की अदालत की कार्यवाही के वीडियो को लेकर आपत्ति जताई। उन्हें कहा कि सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करके उसका मजाक बनाया जा रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अब इससे हर किसी को चीजें पढ़ने और देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है।  वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल स्पेस में डेटा के नियमन पर टिप्पणी करते हुए इसे एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने अदालत की कार्यवाही तक सीमित पहुंच सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुझाव देते हुए कहा कि लाइवस्ट्रीमिंग पर नियंत्रण होना चाहिए और जो पक्ष कार्यवाही देखना चाहता है, उसे इसके लिए स्पष्ट अनुरोध करना चाहिए। उनका कहना था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग पब्लिक प्लेटफॉर्म पर नहीं होनी चाहिए। अगर कोई पक्ष इसकी फीड चाहती है तो उसकी मांग पर ही इसे मुहैया कराया जाना चाहिए।

अक्सर वायरल होते हैं वीडियो

लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान जजों की किसी टिप्पणी या अदालत में हुई चर्चा अक्सर सुर्खियां बन जाती हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत 24×7 मनोरंजन चैनल नहीं बन सकती।

फिलहाल इस मामले की सुनवाई जारी है। इस बीच, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने सर्वसम्मति से अंतरिम आदेश पारित करते हुए अदालती कार्यवाही की क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर रोक लगा दी है। साथ ही, मामले में केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है।

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