रिटायरमेंट के दिन ही IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, 504 करोड़ के बैंक घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन

IDFC First Bank 504 Crore Scam: सेवानिवृत्ति के दिन IAS प्रदीप कुमार को CBI ने 504 करोड़ रुपये के IDFC First Bank घोटाले में गिरफ्तार किया। मामले की जांच जारी है।
IAS Pradeep Kumar arrested on the very day of his retirement; major CBI action in ₹504 crore bank fraud case.
आईएएस प्रदीप कुमार (सोर्स सोशल मीडिया)
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IAS Pradeep Kumar Arrested: हरियाणा के बहुचर्चित 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच की सबसे अहम कड़ी तक पहुंचने का दावा किया है। एजेंसी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन सदस्य सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को उनके सेवानिवृत्ति के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस मामले में सीबीआई ने दो बैंक अधिकारियों से पूछताछ के बाद उनको भी हिरासत में लिया है। जांच एजेंसी का मानना यह है, कि इन गिरफ्तारियों से करोड़ों रुपये के कथित बैंक घोटाले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी निकल कर सामने आ सकती हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो को मिली एक बड़ी सफलता

आपको बताते चले कि हरियाणा के 504 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो को एक बड़ी सफलता मिली है। बता दें, कि जांच एजेंसी ने इस मामले में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन सदस्य सचिव और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने आरोप लगाते हुए यह कहा है कि प्रदीप कुमार ने बोर्ड के 169 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और अवैध ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाई है। जिसे पूरे 504 करोड़ रुपये के घोटाले में किसी एक सरकारी विभाग को हुआ सबसे बड़ा वित्तीय भारी नुकसान माना जा रहा है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में ट्रांसफर

जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी अब उनसे वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क, निर्णय प्रक्रिया और धन के अंतिम लाभार्थियों के बारे में गहन पूछताछ करेगी। वहीं दूसरी तरफ उन्हें सरकारी गवाह बनाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, हालांकि इस संबंध में सीबीआई ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव रहते हुए आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार निवेश और फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े सभी अहम फैसलों की निगरानी स्वयं कर रहे थे। जांच एजेंसी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि बोर्ड की बड़ी राशि निर्धारित वित्तीय सीमा से कहीं अधिक मात्रा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा में ट्रांसफर की गई।

बैंक अधिकारियों को किया गिरफ्तार

सीबीआई के अनुसार, एफडी बनाने के नाम पर सरकारी धन पहले एक अलग बैंक खाते में भेजा गया, लेकिन जांच के दौरान विभाग उस खाते के खुलने से जुड़ा कोई अधिकृत आदेश, स्वीकृति पत्र या आधिकारिक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस खाते में करोड़ों रुपये भेजे गए, उसमें कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाई ही नहीं गई।

यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक सीबीआइ इस मामले में हरियाणा के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, तत्कालीन वित्त विभाग के अधिकारी आरके सिंह, हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, कई बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

साजिश में किन-किन लोगों की थी भूमिका

जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में उसी खाते से फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शनों के जरिए सरकारी धन निकाल लिया गया। इस कथित वित्तीय हेराफेरी के कारण हरियाणा सरकार को करीब 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे लेन-देन की साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका थी और आखिरकार सरकारी धन किन लोगों तक पहुंचा।

चरणजीत सिंह रंधावा को भी किया गिरफ्तार

सीबीआइ का कहना है कि प्रदीप कुमार काफी समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद एजेंसी ने उनकी लोकेशन ट्रेस कर मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को ही एजेंसी ने आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ‘एरिया हेड’ शमीम डार और एयू स्माल फाइनेंस बैंक मोहाली के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरणजीत सिंह रंधावा को भी गिरफ्तार किया।

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