सत्येंद्र जैन पर चला ED का एक और चाबुक! 7.44 करोड़ की संपत्ति कुर्क, जानें किस मामले में हुआ एक्शन?

Satyendra Jain News: ईडी ने सत्येंद्र जैन पर एक और एक्शन लिया है। 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनके नियंत्रण वाली कंपनियों की 7.44 करोड़ रूपये की संपत्ति कुर्क की है।
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सत्येंद्र जैन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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ED Attached Satyendra Jain Property: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के पूर्व मंत्री और आप नेता सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कथित तौर पर उनके नियंत्रण वाली कंपनियों की 7.44 करोड़ रूपये की संपत्ति जब्त की।

24 अगस्त को, ईडी ने सीबीआई के एक मामले में सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ धन शोधन की जांच शुरू की। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र कुमार जैन ने 14 फरवरी, 2015 से 31 मई, 2017 के बीच दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।

साल 2018 में दायर हुई थी चार्जशीट

3 दिसंबर, 2018 को, सीबीआई ने सत्येंद्र कुमार जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। जांच के बाद, ईडी ने 31 मार्च, 2022 को सत्येंद्र कुमार जैन के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों की 4.81 करोड़ रूपये (लगभग 1.25 अरब डॉलर) मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया और 27 जुलाई, 2022 कोप्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी।

अब तक 12.25 करोड़ की संपत्ति अटैच

अदालत ने 29 जुलाई, 2022 को पीसी का संज्ञान लिया। 15 सितंबर को की गई इस नवीनतम कार्रवाई के साथ, ज़ब्त की गई कुल राशि अब 12.25 करोड़ रूपये (लगभग 1.25 अरब डॉलर) हो गई है। एजेंसी का दावा है कि यह जैन द्वारा कथित रूप से अर्जित संपत्तियों का पूरा मूल्य है।

जांच से पता चला कि नवंबर 2016 में, नोटबंदी के बाद, जैन के करीबी सहयोगियों अंकुश जैन और वैभव जैन ने एक बैंक में लगभग 7.44 रूपये करोड़ (लगभग 1.44 अरब डॉलर) नकद जमा किए और आय घोषणा योजना (आईडीएस) 2016 में इसका खुलासा किया। हालांकि, आयकर विभाग, दिल्ली उच्च न्यायालय और यहां तक कि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया कि यह राशि वास्तव में सत्येंद्र जैन की बेनामी संपत्ति थी।

दायर की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट

इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सत्येंद्र जैन की विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) और समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया। ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 66(2) के तहत यह जानकारी सीबीआई के साथ साझा की। इस जानकारी के आधार पर, सीबीआई ने आगे की जांच की और एक पूरक आरोप पत्र दायर किया जिसमें आरोप लगाया गया कि सत्येंद्र जैन ने दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

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