Swatantra Bhardwaj in Police Custody: CJP प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ एक विवाद अब सोशल मीडिया, सियासत और पुलिस कार्रवाई के बीच पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज, जिसका नाम निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट के मामले में सामने आया है। वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर इस घटना का जिक्र करते हुए बड़े राजनीतिक नेताओं से अपनी नजदीकी का दावा किया था। इसी वीडियो के वायरल होने के बाद मामला अचानक राष्ट्रीय राजनीति के निशाने पर आ गया।
4 सितंबर को दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के चोला थाना से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर सीजेपी कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन तथा एफआईआर में कड़ी धाराएं जोड़ने की मांग के बाद हुई। पुलिस ने मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी हैं और नाबालिग से संबंधित शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत अलग एफआईआर भी दर्ज की गई है।
स्वतंत्र भारद्वाज मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और फिलहाल दिल्ली में रहता है। वह सोशल मीडिया पर खुद को हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर मुखर व्यक्ति और ‘सनातनी योद्धा’ के तौर पर पेश करता रहा है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं और उसके वीडियो में हिंदुत्व, राजनीतिक मुद्दों तथा विभिन्न विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कंटेंट दिखाई देते हैं।
इस विवाद की जड़ जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन से जुड़ी है। प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट हुई। मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य व्यक्ति का नाम सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में वायरल वीडियो और विरोध-प्रदर्शनों के बाद इस केस ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया।
विवाद को सबसे ज्यादा हवा उस पॉडकास्ट क्लिप से मिली जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताया।
उसने यह भी दावा किया था कि उन्हें राजनीतिक समर्थन हासिल है और इसी वजह से वह कार्रवाई से बच गए। यह वीडियो वायरल होते ही विपक्षी नेताओं ने इसे मुद्दा बना लिया और भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग शुरू हो गई।
घटना के बाद निशु आजाद ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता के लिए न्याय की मांग शुरू की। उन्होंने कथित तौर पर खुद को और अपने परिवार को मिल रही धमकियों का भी मुद्दा उठाया।
4 सितंबर को प्रदर्शनकारियों के दबाव और पुलिस के साथ बातचीत के बाद मामले की एफआईआर में एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून की धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस ने यह भी कहा कि आगे की जांच और मेडिकल राय के आधार पर अन्य गंभीर धाराओं पर फैसला लिया जा सकता है।
इसके अलावा नाबालिग से संबंधित शिकायत पर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत अलग एफआईआर दर्ज होने की भी रिपोर्ट सामने आई। यानी अब यह विवाद सिर्फ जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग शिकायतों और गंभीर कानूनी धाराओं तक पहुंच गया है। कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।