अरविंद केजरीवाल (Image- Social Media)
Delhi High Court: दिल्ली शराब घोटाले को लेकर आज दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। नई दिल्ली में अदालत ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित आरोपमुक्त किए गए सभी 20 लोगों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने रॉउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा CBI पर की गई कुछ टिप्पणियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है।
दिल्ली शराब नीति से जुड़े CBI केस में आरोपमुक्ति के फैसले को चुनौती देने वाली CBI की याचिका पर सुनवाई के दौरान CBI की ओर से Tushar Mehta (सॉलिसिटर जनरल) ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह याचिका निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें आरोपियों को डिस्चार्ज किया गया था। उनके अनुसार यह मामला देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और राष्ट्रीय शर्म का विषय है।
तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि इस मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई है और साजिश के हर पहलू को स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि हवाला के माध्यम से कई किश्तों में पैसे ट्रांसफर किए गए। ऐसे मामलों में अक्सर पक्ष बदले की भावना का आरोप लगाते हैं, लेकिन यहां सभी प्रमुख गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिल्ली शराब घोटाला केस में कुल 164 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। कुछ गवाहों ने स्पष्ट रूप से बताया कि साजिश कैसे रची गई, रिश्वत किस तरह दी गई और किन-किन लोगों को दी गई। मेहता ने एक व्यक्ति विजय नायर का भी जिक्र किया, जो एक राजनीतिक दल का कम्युनिकेशन इंचार्ज बताया गया है। उनके मुताबिक लोगों को दिए गए फायदों के बदले 19 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई, जिनमें से लगभग 44.50 करोड़ रुपये हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पैसा पार्टी के गोवा चुनाव के लिए भेजा गया था। मेहता ने इसे साफ तौर पर भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि इसमें रिश्वत देने, लेने और उसका इस्तेमाल करने के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के पास ई-मेल और व्हाट्सएप चैट जैसे डिजिटल सबूत भी हैं।
तुषार मेहता ने यह भी बताया कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने ट्रायल कोर्ट में करीब 10 दिनों तक बहस की थी, लेकिन फैसला कुछ ही दिनों में सुना दिया गया। उन्होंने कहा कि तेजी से न्याय देना महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे न्याय की विफलता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अदालत को बताया कि जब साजिश का आरोप लगाया जाता है तो उसके हर हिस्से को जोड़कर साबित करना पड़ता है, क्योंकि साजिश कभी खुलेआम नहीं रची जाती। उनके अनुसार गवाहों के बयान और होटल के रिकॉर्ड जैसे सबूत मौजूद हैं, जिनकी जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान होनी चाहिए, न कि आरोपमुक्ति के चरण में।
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मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में सबूत नष्ट करने की कोशिशें हुईं और लगभग 170 मोबाइल फोन नष्ट कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए कई महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर दिया गया और ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले सबूतों पर भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला।