जस्टिस स्वर्णकांता के सामने पेश होने से अरविंद केजरीवाल का इनकार, चिट्ठी लिखकर बोले- न्याय की उम्मीद टूटी
Arvind Kejriwal: अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता को चिट्ठी लिख कोर्ट में पेश होने से इनकार। कहा- न्याय की उम्मीद नहीं, अब सत्याग्रह का रास्ता चुनेंगे। सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प रखा खुला।
- Written By: अर्पित शुक्ला
अरविंद केजरीवाल और जस्टिस शर्मा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Arvind Kejriwal Letter Justice Swarna Kanta: दिल्ली की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता को चिट्ठी लिखकर साफ कर दिया है कि वह उनके सामने न तो खुद पेश होंगे और न ही किसी वकील के जरिए अपनी पैरवी करवाएंगे।
केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि उन्हें जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की उम्मीद अब टूट चुकी है। इसी कारण उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर लिया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता के फैसले पर जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जस्टिस स्वर्ण कांता के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखेंगे। इस कदम को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है, क्योंकि आम तौर पर ऐसे मामलों में नेता अदालत में पेश होकर अपनी दलील रखते हैं। केजरीवाल का यह रुख आने वाले दिनों में पूरे मामले को और गरमा सकता है।
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In all humility and with complete respect for judiciary, I have written the following letter to Justice Swarna Kanta Sharma, informing her that pursuing Gandhian principles of Satyagraha, it won’t be possible for me to pursue this case in her court, either in person or through a… pic.twitter.com/HmyOyNYug8 — Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 27, 2026
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति से जुड़ा है। अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग (recusal) करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि जज पक्षपाती हो सकते हैं, और उन्होंने इसके समर्थन में कई कारण भी दिए, जिनमें जज के बच्चों का सरकारी वकीलों के साथ संबंध भी शामिल था।
जस्टिस स्वर्णकांता ने क्या फैसला सुनाया?
हालांकि, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने हाल ही में इस याचिका को स्पष्ट शब्दों में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका शपथ संविधान से है और वे किसी दबाव में नहीं आएंगी। जज ने केजरीवाल की याचिका को ‘बिना प्रमाण के आरोप’ बताया और कहा कि ऐसे आवेदन न्यायिक प्रक्रिया पर हमला हैं। उन्होंने अपने फैसले में जोर देकर कहा, “अगर मैं हट जाऊंगी तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर जज को हटाया जा सकता है।”
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केजरीवाल की इस चिट्ठी और उनके फैसले ने शराब नीति मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट इस नई स्थिति पर क्या रुख अपनाता है और केजरीवाल का सत्याग्रह का रास्ता कानूनी दृष्टि से कितना असरदार साबित होता है।
