नागपुर मनपा का फर्जी एवजदार घोटाला अब EOW के हवाले; कमिश्नर के एक्शन से मची खलबली, दो कर्मचारी सस्पेंड

Nagpur NMC Financial Scam: नागपुर मनपा के लकड़गंज जोन में फर्जी एवजदारों के नाम पर हुए वित्तीय घोटाले की जांच अब EOW को सौंप दी गई है। दो कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया गया है।
Nagpur Municipal Corporation's 'fake substitute worker' scam handed over to the EOW; Commissioner's action sparks a stir, two employees suspended.
प्रतीकात्मक तस्वीर,(साेर्स: एआई फोटो)
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Nagpur Lakadganj Zone Fake Employees Financial Scam: नागपुर महानगर पालिका के लकड़गंज जोन अंतर्गत फर्जी एवजदारों के नाम शामिल कर किए गए वित्तीय घोटाले की परतें अब खुलने लगी हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राथमिक स्तर पर बनाई गई एक सदस्यीय जांच समिति की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त ने इन घोटालेबाजों पर नकेल कसने का पूरा इंतजाम कर लिया है।

भ्रष्टाचार का खुलासा होते ही आयुक्त के आदेशों के अनुसार पूरा मामला जांच के लिए अब ईओडब्ल्यू (EOW) पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा गया है। इसी के साथ प्राथमिक स्तर पर एक महिला और एक पुरुष कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निलंबित भी किया गया है। भले ही फिलहाल 2 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ हो, लेकिन जांच के लिए अब मामला आर्थिक अपराध विभाग को सौंप जाने से खलबली मची हुई है।

बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास

मनपा प्रशासन की ओर से भले ही कड़ा रुख अपनाते हुए मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा गया हो, इसके बावजूद इसमें केवल छोटी मछलियों को जाल में फंसाकर बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद होने के आरोप भी लग रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि मनपा में वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया देखी जाए, तो इसमें किसी बड़े अधिकारी और वेतन से संबंधित सभी विभागों के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि केवल कमजोर कड़ियों के खिलाफ कार्रवाई का जाल बुनकर कुछ कार्रवाई होने का दिखावा हो रहा है। बहरहाल अब ईओडब्ल्यू के पास मामला होने से जल्द ही नए खुलासे होने के भी आसार जताए जा रहे हैं।

नेहरूनगर जोन में भी घूम रही घोटाले की सुई

सूत्रों के अनुसार हाल ही में मनपा आयुक्त की ओर से नेहरूनगर जोन में बैठक ली गई जिसमें पक्ष और विपक्ष के तमाम नगरसेवकों का मानना था कि यहां पर 425 से अधिक सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। कागजों पर भले ही इतनी संख्या हो, लेकिन वास्तविक रूप में इतने कर्मचारी काम करते दिखाई नहीं देते हैं।

इसी तरह से कुछ दिनों पहले एक नगरसेवक ने गांधीबाग जोन में सफाई कर्मचारी के नाम पर अन्य व्यक्तियों द्वारा काम किए जाने की सूची ही प्रशासन को सौंपी थी, लगातार अन्य विभागों से भी मिल रहे संकेतों के बाद तमाम जोन में इसकी जांच की संभावना जताई जा रही थी किंतु मनपा प्रशासन ने लकड़गंज जोन का मामला ईओडब्ल्यू को देकर मौन साध लिया है।

राजनीतिक दल से भी संबंध

जानकारों की मानें तो वेतन भुगतान घोटाले को 2 माह पूर्व उजागर किया गया था किंतु जांच के नाम पर 2 माह तक मनपा की ओर से जांच की गई। इसके बाद ही पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई।

बताया जाता है कि इस मामले में कथित आरोपियों के राजनीतिक संबंधों के चलते ही कोताही बरती जा रही है। चूंकि मामला लकड़गंज जोन से संबंधित होने के कारण भी प्रशासन पर दबाव होने की आशंका जताई जा रही है।

अन्य विभागों के अधिकारियों की मानें तो इन कथित आरोपियों की ओर से घोटाला किए जाने के बाद इसकी सूची बैंक से मांगी गई थी जबकि इसकी सूची अन्य विभाग में भी होनी चाहिए थी। इसके बावजूद बैंक से सूची क्यों मांगी गई, यही सोच से परे होने की आशंका जताई गई।

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