

आम लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण।
गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक की सड़क की खराब।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री पवन साय ने भी जताई थी नाराजगी।
अब आंदोजन की तैयारी में सामाजिक कार्यकर्ता।
Protest by Social Activist in Ambikapur: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में सड़क की बदहाली अब आम लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गई है। बारिश के दौरान गड्ढों और जलभराव से जूझने वाले लोगों को अब धूल के गुबार से राहत नहीं मिल रही है। गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों में नाराजगी बढ़ रही है। खास बात यह है कि सड़क की समस्या पहले भी सुर्खियों में आ चुकी है। एक नेता की गाड़ी सड़क पर फंसने के बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री पवन साय ने भी नाराजगी जताई थी। इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी है।
अंबिकापुर की सड़कों पर परेशानी का सिलसिला बारिश के साथ शुरू हुआ था लेकिन मौसम साफ होने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और बिखरी गिट्टी अब धूल की समस्या बढ़ा रहे हैं। वाहनों के गुजरते ही धूल का गुबार उठता है, जिससे राहगीरों के साथ आसपास के दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने और गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया था। अब बारिश थमने के बाद धूल ने नई समस्या खड़ी कर दी है। दुकानों में धूल पहुंचने से कारोबार प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
सड़क की बदहाली को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। एक नेता की गाड़ी सड़क पर फंसने की घटना के बाद पवन साय की नाराजगी सामने आई थी। उस समय सड़क की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हुई थी। अब एक बार फिर वही समस्या लोगों के सामने है और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से बारिश खत्म होने के बाद सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे जनता की समस्या को लेकर फिर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।