सरगुजा में दंतैल ने चाचा को कुचलकर मार डाला, भतीजे ने ट्रक के नीचे छिपकर बचाई जान

Surguja Elephant Attack: सरगुजा में दंतैल ने बाइक से जा रहे चाचा और भतीजे पर हमला कर दिया। जानलेवा हमले में चाचा की मौत हो गई। जबकि भतीजे ने अपनी जान बचा ली।
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चाचा-भतीजे पर हाथी का हमला(सोर्स - सोशल मीडिया)
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Highlights

  • आखोरा गांव में बाइक सवार चाचा-भतीजे पर हाथी का हमला।

  • लंबे समय से इलाके में विचरण कर रहा कबरा हाथी।

  • वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल।

  • भतीजे ने सूझबूझ दिखाते हुए छुप गया ट्रक के नीचे।

Chhattisgarh Elephant Attack: छत्तीसगढ़ के सरगुजा में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हाथी अब लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। ताजा मामला लटोरी चौकी क्षेत्र के आखोरा गांव का है, जहां एक दंतैल हाथी ने बाइक सवार चाचा-भतीजे पर हमला कर दिया। हमले में चाचा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भतीजे ने ट्रक के नीचे छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाई। मृतक की फिलहाल पहचान नहीं हो पाई है।

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अचानक सामने आया हाथी, संभलने का मौका तक नहीं मिला

जानकारी के मुताबिक, चाचा-भतीजे बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में दंतैल हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हाथी ने चाचा को अपनी चपेट में लेकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, भतीजे ने सूझबूझ दिखाते हुए पास खड़े ट्रक के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

कबरा हाथी की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा की व्यवस्था नहीं

बताया जा रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से कबरा नाम का हाथी विचरण कर रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह हाथी पहले भी कई लोगों की जान ले चुका है। इसके बावजूद लगातार हाथी की मौजूदगी के बीच वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने और हाथियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है। वहीं, घटना को लेकर वनमंडलाधिकारी की ओर से भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग कब ठोस इंतजाम करेगा, ताकि किसी और परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।