

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में 448 पदों के लिए 2022 में विज्ञापन निकला था।
भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ते हुए दस्तावेज सत्यापन के चरण तक पहुंच गई थी।
शासन ने इस प्रक्रिया को अचानक रद्द कर नया विज्ञापन निकालने का निर्णय लिया।
अभ्यर्थियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला निरस्त कर भर्ती पूरी करने का आदेश दिया।
Ambikapur Medical College recruitment Verdict : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने यह निर्णय दिया। मामला अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्य सरकार का फैसला निरस्त कर दिया है।
राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में नियुक्तियां होनी हैं। यहां तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कुल 448 पद हैं। शासन ने इन पदों की भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। अदालत ने सरकार के इस कदम को मनमाना और अनुचित बताया।
जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की बेंच ने सुनवाई की। उन्होंने पुरानी भर्ती प्रक्रिया को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया। अब प्रक्रिया उसी चरण से आगे बढ़ेगी जहां इसे रोका गया था। कोर्ट ने इसके लिए तीन महीने की समयसीमा तय की है।
मेडिकल कॉलेज में पदों के लिए जुलाई 2022 में विज्ञापन जारी हुआ था। भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ रही थी। मेरिट सूची तैयार होने के बाद अभ्यर्थियों को सत्यापन के लिए बुलाया गया था। अगस्त 2023 में दस्तावेज जांच की प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए। अप्रैल 2025 में सामान्य सभा की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में पूरी भर्ती प्रक्रिया को अचानक निरस्त कर दिया गया। सरकार ने व्यावसायिक परीक्षा मंडल (VYAPAM) से नई भर्ती का फैसला लिया।
इस फैसले से निराश होकर अभ्यर्थियों ने न्याय का दरवाजा खटखटाया। आदित्य सैनी समेत 11 अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की। उन्होंने हाईकोर्ट में शासन के फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाओं पर लंबी सुनवाई के बाद अब अंतिम निर्णय आया है।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने अपनी सफाई पेश की। शासन की ओर से अधिक आवेदनों का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आवेदनों के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही थी। इसलिए भर्ती रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
हालांकि सरकारी दावे की पोल कॉलेज डीन के पत्र से खुल गई। डीन ने जून 2025 में एक औपचारिक पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट बताया गया कि कुल 55,335 आवेदन ही मिले थे। इनमें तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 आवेदन आए थे।
वहीं चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 फॉर्म जमा हुए थे। यह संख्या सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों से काफी कम थी। सामान्य सभा में एक लाख से अधिक आवेदनों का दावा किया गया था। कोर्ट ने इस अंतर को गंभीरता से लिया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने माना कि केवल सत्यापन से नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता। लेकिन भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के लिए ठोस कारण होना जरूरी है। सरकार ऐसा कोई भी वाजिब कारण पेश नहीं कर सकी।
अदालत ने कहा कि पुरानी प्रक्रिया में कोई खामी साबित नहीं हुई। अचानक भर्ती रद्द करने से अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचता है। कई अभ्यर्थियों की निर्धारित आयु सीमा समाप्त हो सकती है। ऐसे में बिना आधार भर्ती रोकना सरासर गलत है।
हाईकोर्ट ने रद्द करने संबंधी फैसले और पत्र को पूरी तरह निरस्त कर दिया। अब अधिकारियों को अभ्यर्थियों की पात्रता की जांच करनी होगी। तुलनात्मक मेरिट सूची तैयार कर पात्र लोगों को नियुक्ति दी जाएगी। इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं को राहत मिलेगी।