मां की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी की मांग, 45 साल की उम्र पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

Chhattisgarh High Court : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 47 वर्षीय बेटी की अनुकंपा नियुक्ति याचिका खारिज कर दी। अदालत ने 45 वर्ष की अधिकतम उम्र सीमा को सही ठहराया।
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालयसोर्स - सोशल मीडिया
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Highlights

  • जगदलपुर की रहने वाली शांति सेठिया की मां का कैंसर से निधन हो गया।

  • मां शासकीय महाविद्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत थीं।

  • मां के निधन के बाद बेटी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया।

  • विभाग ने 45 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण आवेदन रद्द कर दिया।

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विभाग के इस फैसले को सही ठहराया है।

Bilaspur High Court Writ Petition Dismissed : शांति सेठिया जगदलपुर की रहने वाली हैं। उनकी मां कॉलेज में सहायक थीं। मां का निधन कैंसर के कारण हुआ था। मां को भी अनुकंपा से नौकरी मिली थी।

शांति ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। विभाग ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। खारिज करने की वजह उनकी अधिक उम्र थी। उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है।इसके बाद शांति ने हाई कोर्ट का रुख किया।

हाई कोर्ट में याचिका दायर

मामले की सुनवाई बिलासपुर हाई कोर्ट में हुई। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील ने आर्थिक तंगी की दलील दी। उन्होंने बताया कि परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है।

शांति अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। वकील ने 2007 के परिपत्र का हवाला दिया। उन्होंने उम्र सीमा में छूट देने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

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2013 की नीति बनी बाधा

राज्य सरकार ने अपनी नीति का हवाला दिया। सरकार ने 14 जून 2013 की नीति रखी। इस नीति के तहत अधिकतम उम्र 45 वर्ष है। शांति सेठिया इस उम्र सीमा को पार कर चुकी हैं। इसलिए उनका आवेदन नियमों के तहत खारिज हुआ। हाई कोर्ट ने सरकार के तर्क को सही माना। अदालत ने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है। अधिकारियों के फैसले में कोई अवैधता नहीं है।

विधवा और बेटी के नियम

हाईकोर्ट ने 2007 के परिपत्र को स्पष्ट किया। उम्र में छूट का नियम केवल विधवा के लिए है। यह छूट मृत कर्मचारी की पत्नी को मिलती है। याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी हैं। इसलिए बेटी को यह लाभ नहीं मिल सकता। नियमों के तहत केवल विधवा ही पात्र है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इस तरह शांति सेठिया की उम्मीद टूट गई।

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