मैं जिंदा हूं, मेरी हत्या नहीं हुई...शख्स को देखकर पुलिस-परिजन के उड़े होश, साथियों को हो चुकी है जेल

CG News: छ्त्तीसगढ़ के जशपुरनगर में हत्या के मामले में पुलिस जिस इंसान को मृतक बता रही थी, वह शनिवार की रात को कोतवाली थाना पहुंच गया। उसने कहा कि साहब मैं जिंदा हूं। मेरी हत्या नहीं हुई।
Sir, I am alive, I was not murdered...The police and the family were shocked to see the man in front of them
हत्या के जुर्म में गिरफ्तार आरोपी और जीवित पाया गया शख्स।
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CG Latest News: साहब! मैं जिंदा हूं, मेरी हत्या नहीं हुई है। मैं रोजगार की तलाश में झारखंड गया हुआ था। वहां अपने साथियों को छोड़ कर आगे निकल गया था। हत्या मामले में पुलिस जिस सीमित खाखा को मृतक बता रही थी, वह शनिवार रात कोतवाली थाना पहुंच कर उक्त बातें कही। सीमित को जिंदा देखकर पुलिस के साथ उसके परिजन और ग्रामीण आश्चर्य चकित हैं। अब पुलिस मामले में नए सिरे से जांच की बात कह रही।

मामला छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिटोंगा का है। दरअसल, कोतवाली थाना क्षेत्र के पुरना नगर और बालाछापर के बीच स्थित जंगल में 22 अक्टूबर को अधजला शव पुलिस को मिला था। कोतवाली पुलिस ने शव की पहचान सिटोंगा निवासी सीमित खाखा 30 वर्ष के रूप में की थी। हत्या मामले का 2 नवंबर को पुलिस ने खुलासा किया था।

साथियों पर ही लगा हत्या का आरोप

पुलिस ने बताया था कि सीमित खाखा अपने चार साथियों के साथ बोरिंग वाहन में काम करने के लिए झारखंड गया था। वहां काम करने के बाद चारों दोस्त 17 अक्टूबर को वापस जशपुर लौटे थे। पुलिस के अनुसार बस से सीमित खाखा, रामजीत राम 25 वर्ष, वीरेंद्र राम 24 वर्ष और एक अपचारी बालक शहर के बांकी टोली में बांकी नदी के पुलिया के पास पहुंचे। यहां चारों लोगों ने शराब पी। नशे में चारों के बीच कमीशन की राशि को लेकर विवाद हो गया। रामजीत ने सीमित खाखा के सीने में चाकू से और वीरेंद्र राम ने लोहे की रॉड से वार किया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई।

जंगल में दफना दिया था शव, जलाने की भी कोशिश

पुलिस ने यह भी कहा था कि हत्या को छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को घटनास्थल से 400 मीटर दूर स्थित जंगल के एक गड्ढे में डाल दिया। पेट्रोल डाल कर शव को जलाने की कोशिश की थी। मामले में कोतवाली पुलिस ने आरोपी रामजीत राम, वीरेंद्र राम और अपचारी बालक के विरुद्ध हत्या और साक्ष्य मिटाने का अपराध कायम करते हुए गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा था।

सीमित को लेकर थाने पहुंचीं सरपंच

मामले में शनिवार रात नया मोड़ आया, जब मृतक सीमित खाखा, ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना लकड़ा के साथ सिटी कोतवाली पहुंचा। सरपंच ने बताया कि सीमित शनिवार को झारखंड से आने वाली एक बस से उतरा और सिटोंगा आने वाले ऑटो में बैठा। ऑटो का चालक सीमित को पहचानता था, उसी ने फोन कर उसे बताया कि जिस सीमित की हत्या के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, वह जीवित है। ऑटो में सवार है। इस पर सरपंच सीमित को लेकर सीधे कोतवाली थाना पहुंच गई।

साथियों को छोड़कर चला गया था गिरिडीह

सीमित ने बताया कि वह रोजगार की तलाश में अपने साथियों के साथ झारखंड पहुंचा था। रांची में वह साथियों से अलग होकर गिरिडीह जिले के सराईपाली गांव पहुंच गया था और यहां खेत में मजदूरी का काम कर रहा था। उसके पास मोबाइल न होने के कारण वह किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। अब वह क्रिसमस मनाने के लिए घर लौटा है। सीमित को जीवित देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।

आरोपियों ने कबूला था आरोप

एसडीओपी चंद्रशेखर परमा ने बताया कि हत्या इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। सीमित खलखो के माता-पिता और भाई ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अधजले शव की पहचान की थी। आरोपियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हत्या का अपराध स्वीकार किया था। दोनों प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई है। एसडीओपी ने बताया कि मामले की अब नए सिरे से जांच की जाएगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के अस्थायी रिहाई की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

क्राइम सीन का हुआ था रिक्रिएशन

पुलिस ने हत्या स्थल बांकी नदी के पुल से शव को जलाने के स्थल जंगल तक क्राइम सीन को रिक्रिएट किया था, ताकि पूरा मामला क्लियर हो सके। इतनी सावधानी के बावजूद शव के पहचान में हुई चूक से पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है। जशपुर के एसडीओपी चंद्रशेखर परमा का कहना है कि सीमित खाखा की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच के दौरान पहचान और अपराध स्वीकार करने की प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया है। सीमित के लौटने के बाद इस मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी।

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