कौन था 50 लाख का इनामी माओवादी कमांडर पापा राव? सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में किया ढेर

Who is Papa Rao: छत्‍तीसगढ़ में पापा राव की पहचान एक खूंखार नक्सल कमांडर की थी, जिसने कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें काफी सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए।
Who is Papa Rao Maoist Commander Killed in Bijapur Encounter
माओवादी कमांडर पापा राव
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Chhattisgarh Naxalite Encounter: छत्तीसगढ़ में दशकों से खौफ का पर्याय बने माओवादी कमांडर पापा राव को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। सूत्रों के मुताबिक, बीजापुर जिले में चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के दौरान उसे ढेर किया गया। पापा राव पर सरकार ने 50 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और वह लंबे समय से सुरक्षाबलों की रडार पर था। बीते कुछ दिनों से सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर था और आखिरकार उन्हें बड़ी सफलता हाथ लगी।

नक्सली कमांडर पापा राव को पकड़ने के लिए हाल ही में सुरक्षा बलों ने एक व्यापक अभियान शुरू किया था। कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के बड़े माओवादी नेता देवा बरसे ने हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था, जबकि उसके साथ 20 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए थे। इसके बाद पापा राव ही राज्य में माओवादियों का सबसे बड़ा कमांडर बचा था, जिसे अब एनकाउंटर में मार गिराया गया है।

कौन था नक्सली पापा राव?

पापा राव छत्तीसगढ़ में एक खूंखार नक्सल कमांडर के रूप में जाना जाता था। उसने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया था, जिनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए। बीजापुर इलाके में वह पिछले कई दशकों से आतंक का दूसरा नाम बना हुआ था। 6 जनवरी 2025 को कुटरू बेदरे रोड पर हुए आईईडी ब्लास्ट में 8 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे, जबकि वाहन चालक की भी मौत हुई थी। इस हमले का मास्टरमाइंड पापा राव ही था। इसके बाद से ही सुरक्षा बल उसे पकड़ने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए थे और सरकार ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

पापा राव की पत्नी भी थी नक्सली

पापा राव की पत्नी उर्मिला भी एक सक्रिय नक्सली थी और गुरिल्ला आर्मी बटालियन की सदस्य रही है। नवंबर में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में उर्मिला मारी गई थी। वह माओवादियों की पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन के लिए रसद आपूर्ति की मुख्य संचालक थी।

आठ लाख रुपये की इनामी उर्मिला अपने पति पापा राव के साथ लंबे समय तक सक्रिय रही। वह पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव थी, जिसे माओवादी संगठन की सबसे हिंसक एरिया कमेटियों में से एक माना जाता है। हाल के वर्षों में आम ग्रामीणों की हत्या की कई घटनाएं इसी कमेटी के तहत हुई थीं। उर्मिला न केवल इस कमेटी की सचिव थी, बल्कि संगठन की राजनीतिक शाखा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही थी।

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