राजनांदगांव में 5 लाख की रिश्वत मांगना प्रधान आरक्षक को पड़ा भारी, रंगेहाथ ACB ने दबोचा

Rajnandgaon Constable Suspended : बसंतपुर थाने के प्रधान आरक्षक किशोर यादव को 20 हजार की रिश्वत लेते एसीबी ने पकड़ा। 18 लाख के विवाद में 5 लाख मांगने पर एसपी अंकिता शर्मा ने उसे निलंबित किया।
Rajnandgaon Constable Suspended
राजनांदगांव आरक्षक निलंबितसोर्स - सोशल मीडिया
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Highlights

  • बसंतपुर थाने के प्रधान आरक्षक किशोर यादव को रिश्वत लेते पकड़ा गया।

  • एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

  • आरोपी ने शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

  • रिश्वत की पहली किस्त 20 हजार रुपये लेते ही कार्रवाई हुई।

  • एसपी अंकिता शर्मा ने तत्काल प्रभाव से आरोपी को निलंबित कर दिया।

Rajnandgaon Police Constable Arrested : राजनांदगांव के बसंतपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक पर बड़ी विभागीय कार्रवाई हुई है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने आरोपी किशोर यादव को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। निलंबन के बाद उसे रक्षित केंद्र से संबद्ध कर दिया गया है।

प्रधान आरक्षक क्रमांक 1470 पर अपने पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है। एसपी ने जारी आदेश में उसके कृत्य को गंभीर कदाचरण माना है। यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो की गिरफ्तारी के ठीक बाद की गई है।

5 लाख रुपये की घूस का मामला

यह पूरा मामला 18 लाख रुपये के निजी लेनदेन के विवाद से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता गौरव अग्रवाल ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत की थी। आरोपी आरक्षक ने पीड़ित के पक्ष में कार्रवाई के लिए घूस मांगी थी।

समझौता कराने के एवज में आरोपी ने 5 लाख रुपये की मांग की थी। मांग से परेशान होकर पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में कर दी। एसीबी की टीम ने शिकायत की जांच की और आरोप को सही पाया।

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रंगे हाथों पकड़ा गया आरोपी

एसीबी (ACB) ने आरोपी को पकड़ने के लिए एक योजना बनाई। योजना के तहत 4 नवंबर को शिकायतकर्ता को पहली किस्त लेकर भेजा गया। जैसे ही पीड़ित ने 20 हजार रुपये दिए, टीम ने छापा मार दिया।

मौके से रिश्वत की रकम भी सफलतापूर्वक बरामद कर ली गई। टीम ने प्रधान आरक्षक किशोर यादव को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई तेजी से की गई।

पुलिस विभाग की छवि पर असर

एसपी अंकिता शर्मा ने अपने आदेश में सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा आचरण पुलिस विभाग की छवि धूमिल करता है। यह कृत्य पूरी तरह से अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

विभाग में ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए कोई जगह नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सख्त कदम की शहर में काफी चर्चा हो रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

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