छत्तीसगढ़ में कानफोड़ू DJ के खिलाफ एकजुट हुआ मेडिकल जगत, कोलाहल नियंत्रण विधेयक पर दर्ज कराईं आपत्तियां

Chhattisgarh DJ noise pollution Law: शहर के प्रमुख चिकित्सकों, मेडिकल कॉलेज, AIIMS के डॉक्टरों ने विधेयक के प्रारूप पर अपना पक्ष रखते हुए, प्रमुख सचिव, गृह विभाग और पुलिस को सुझाव भेजे हैं।
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कानफोड़ू DJ(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights

  • राज्य शासन ने 29 सितंबर को जारी की सार्वजनिक सूचना।

  • छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, गृह विभाग और पुलिस को भेजा अपना पक्ष।

  • प्रारूप पर 30 दिनों के भीतर मांगी गई थीं आपत्तियां और सुझाव।

  • मेडिकल, आयुर्वेदिक छात्र, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ भी हुए शामिल।

Raipur AIIMS Doctors DJ Sound Pollution Proposal: छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण अधिनियम विधेयक, 2026 के प्रारूप पर रायपुर के मेडिकल जगत ने एकजुट होकर आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत किए हैं। शहर के प्रमुख चिकित्सकों, मेडिकल कॉलेज एवं AIIMS के डॉक्टरों, पीजी रेजिडेंट्स, मेडिकल व आयुर्वेदिक छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों ने विधेयक के प्रारूप पर अपना पक्ष रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, गृह विभाग और पुलिस को सुझाव भेजे हैं। गौरतलब है कि राज्य शासन ने 29 सितंबर को सार्वजनिक सूचना जारी कर विधेयक के प्रारूप पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए थे। अंतिम तिथि से पहले चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराईं।

मेडिकल छात्र समुदाय भी बड़ी संख्या में आगे आया

डॉ. गुप्ता ने बताया कि देश में यह पहली बार हुआ है कि किसी शहर के मेडिकल जगत ने सामूहिक रूप से ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसके विरुद्ध प्रदेशभर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

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डॉ. गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ जूडो अध्यक्ष डॉ रेशम सिंह, रायपुर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन अध्यक्ष डॉक्टर पीयूष श्रीवास्तव और इन सर्विस डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अंजन सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा मणि लोधी के नेतृत्व में रायपुर, कवर्धा, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर एवं अंबिकापुर सहित विभिन्न स्थानों के साथ AIIMS रायपुर के पांच सौ से अधिक एमबीबीएस एवं पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने भी दर्ज कराईं आपत्तियाँ

ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध मुहिम चलाने वाले रायपुर के समाजसेवी एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि उनके अलावा हस्ताक्षर करने वालों में शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. प्रीती गुप्ता (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. अनिल जैन (ENT सर्जन), निंदर सिंह चावला (ENT सर्जन), डॉ. सौरब चोपड़ा (ओर्थोपेडिक्ट), डॉ विवेक अग्रवाल (फिजीशियन), डॉ. पियूष दुबे (एनेस्थीसिया), डॉ ऋषि अग्रवाल (एम.एस.), पंकज मूटघरे (एम.डी.मेडिसिन)।

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डॉ. चिराग अग्रवाल (एम.डी.मेडिसिन), डॉ. दीपक अग्रवाल (डी. ओर्थो), डॉ. गगनदीप सिंह सलूजा (एम.डी. रेडियो), डॉ. सुप्रिया गुप्ता (एम.एस.,DNB गायनो), डॉ. अर्चना पराग (निश्चेतना विशेषज्ञ), डॉ. रश्मि उम्बरकर (DNB), डॉ. अनीश मेमन (बाल रोग विशेषज्ञ - एकता अस्पताल), डॉ. रूपेश जैन (बच्चों के नेफ्रोलोजिस्ट), डॉ. कुसुम चंद्राकर (बाल रोग विशेषज्ञ), डॉ तेजस मालू (DNB), डॉ. सुकन्या (DCH, DNB), डॉ. आकाश (DNB)।

डॉ. गनपत झा (बच्चों के इंटेंसिव केयर विशेषज्ञ), डॉ. अरविन्द कुमार सक्सेना (MS-ENT), डॉ. आशीष कुमार शर्मा (यूरोलाजिस्ट), तिवारी नर्सिंग होम की डॉ. भारती तिवारी, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. शांतनु तिवारी, डॉ. शीतल तिवारी तथा डॉ. आशीष मल्होत्रा (ह्रदय रोग विशेषग्य) सहित अनेक चिकित्सक शामिल हैं। इन सभी ने विधेयक के प्रारूप पर आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए वाहनों पर डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

इनके अलावा जिला अस्पताल से डॉ. नीति वर्मा, डॉ. देवाशीष महापात्र, डॉ अविनाश सिंह, डॉ. कुश पाण्डेय, डॉ. अनुरब सिंह, डॉ. प्रतीक्षा उपाध्याय, डॉ. रानू गोयल, डॉ. पार्थिव उपाध्याय, डॉ. आयुषी गोयल, डॉ. मनीष, सर्वेश आनंदकर, डॉ दीपिका कोमा, डॉ. रोनक, डॉक्टर समीक्षा गुप्ता तथा अन्य चिकित्सकों ने भी आपत्तियाँ एवं सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इनके साथ नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल छात्र और मेडिकल इंटर्न भी शामिल हैं। सभी ने वाहनों पर डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है।

देशभर के मेडिकल छात्र शामिल

इनमें राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के छात्र भी शामिल हैं। आपत्तियाँ एवं सुझाव प्रस्तुत करने वालों में AIIMS के 92 डॉक्टर, पीजी रेजिडेंट्स तथा वर्ष 2022 से 2025 बैच के 262 मेडिकल छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के 74 एमडी एवं एमएस स्कॉलर्स और छात्रों ने भी विधेयक के प्रारूप पर अपनी आपत्तियाँ एवं सुझाव दर्ज कराए हैं।

नागरिक समाज भी सामने आया

डॉ. गुप्ता ने बताया कि शहर के प्रबुद्ध नागरिक उमा शंकर ओझा, हरजीत जुनेजा, पवन चंद्राकर, बुजित जोशी, राजीव लूथरा, अधीर भगवानानी, तजेंद्र कुमार जग्गी, रियाज अंबर, जमील हुसैन, मो. मुस्तफा, अक्तर अली, हकीमुद्दीन, एस.बानो, तफ़्फ़ज़्ज़िल हुसैन, कयाम भाई, मोईस अली, हातिम अली, मुस्तफा हुसैन, ज़फर हुसैन एवं अन्य नागरिकों ने भी अपनी आपत्तियाँ एवं सुझाव प्रेषित किए हैं।

क्या हैं प्रमुख आपत्तियाँ एवं सुझाव?

1. वाहनों पर डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

वाहनों पर डीजे एवं अन्य ध्वनि प्रवर्धन यंत्रों के तेज आवाज में उपयोग से सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है। अत्यधिक शोर से तनाव, रक्तचाप बढ़ने तथा हृदय रोगियों में हृदयाघात (हार्ट अटैक) का खतरा भी बढ़ सकता है। त्योहारों के दौरान ऐसे मरीज अस्पताल पहुँचते हैं, लेकिन उपचार में देरी से कुछ मामलों में सुनने की क्षमता वापस पाना संभव नहीं हो पाता। इसलिए प्रस्तावित विधेयक में वाहनों पर डीजे एवं अन्य ध्वनि प्रवर्धन यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध तथा उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया जाए।

2. खतरनाक एवं अत्यधिक तेज रोशनी वाली लाइट

डीजे के साथ उपयोग की जाने वाली मूविंग हेड बीम एवं अत्यधिक तेज रोशनी वाली लाइटों की सीधी किरणें आँखों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में दृष्टि को स्थायी क्षति भी हो सकती है। इसलिए वाहनों पर डीजे पर प्रतिबंध लगाया जाए। केवल लाइटों की तीव्रता या दिशा नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा तथा ऐसे प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना भी कठिन होगा।

3. अस्पतालों के आसपास 300 मीटर तक मौन क्षेत्र घोषित किया जाए

नवजात शिशुओं, बच्चों, बुजुर्गों, हृदय रोगियों एवं गंभीर रूप से बीमार मरीजों के स्वास्थ्य और उपचार को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लिनिक तथा अन्य चिकित्सा संस्थानों को मौन क्षेत्र घोषित किया जाए तथा उनके चारों ओर 300 मीटर की परिधि में ध्वनि प्रदूषण रोकने के प्रभावी प्रावधान किए जाएँ। साथ ही, शिकायतों के त्वरित निवारण एवं उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

4. ध्वनि प्रदूषण से जुड़े विवादों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था हो

हर वर्ष डीजे बजाने और रोकने को लेकर विवाद, मारपीट और हत्या जैसी घटनाएँ सामने आती हैं। अत्यधिक शोर से तनाव, नींद में बाधा और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ता है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, दुर्ग जिले में भी पूर्व में ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें तेज आवाज बंद कराने के अनुरोधों के बावजूद राहत नहीं मिलने से परेशान एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था की जाए।