

CSPDCL में अधिकारियों के लिए वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर उठे सवाल।
शिकायतों में निर्धारित सीमा से अधिक कीमत वाले वाहन लगवाने के आरोप।
नए वाहन लगवाने से विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका।
अधिकारियों के तबादले के बाद भी पुराने कार्यादेश की अवधि पूरी होने से पहले वाहन बदलने की शिकायत।
CSPDCL Officers Disregard For Rules: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) में अधिकारियों के लिए वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निर्धारित नियमों के बावजूद अधिकारी अपने कैटेगिरी से अधिक कीमत वाले वाहन लगवा रहे हैं। इतना ही नहीं अधिकारियों के तबादले के बाद भी पुराने कार्यादेश की अवधि पूरी होने से पहले वाहन हटवाकर नए वाहन लगवाने की बात कही जा रही है। इससे विभाग को अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार मुख्यालय में कार्यकारी निदेशक, मुख्य अभियंता और समकक्ष पदों के लिए 10 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली कैटेगरी-1 कार का प्रावधान बताया गया है। वहीं फील्ड में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और समकक्ष पदों के लिए 11 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली एसयूवी का उल्लेख है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाहन लगाने के दौरान निर्धारित कीमत और श्रेणी का पालन किया जा रहा है? इसकी जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारी का तबादला होने पर कई बार नएअधिकारी कार्यादेश की अवधि समाप्त होने से पहले ही वाहन बदलने की मांग करता है। आरोप है कि वाहन ठेकेदारों को एक महीने का नोटिस देकर वाहन हटाने के लिए कहा जाता है जबकि वाहन मालिकों के मुताबिक निर्धारित शर्तों के तहत बिना उचित कारण कार्यादेश बीच में समाप्त नहीं किया जा सकता।
वाहन खरीदने और अनुबंध के तहत उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों को समय से पहले वाहन हटने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। रोजगार और भुगतान की मजबूरी के कारण वे अधिकारियों की मांग मानने को विवश होने का दावा करते हैं। वहीं, बार-बार नए वाहन लगाने और निर्धारित सीमा से महंगे वाहन इस्तेमाल करने की स्थिति में सरकारी खर्च बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। शिकायत में पुराने वाहनों के उपयोग और छह साल तक वाहन चलाने की संभावित व्यवस्था की भी जांच की मांग उठती है।
क्या CSPDCL में वाहन आवंटन, अनुबंध समाप्ति और वाहन बदलने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार चल रही है? क्या इन मामलों का वित्तीय ऑडिट कराया जाएगा? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही सामने आ सकता है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने सीधे मिलने और बातचीत करने से मना कर दिया। ऐसे में अब विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और शिकायतों की निष्पक्ष जांच का इंतजार है।