

गोबरा नवापारा में गरीबों के चावल पर बड़ा सवाल
राशन घोटाले की जांच की मांग तेज हुई
उचित मूल्य दुकान के चावल पर हंगामा
बिचौलियों के कब्जे से चावल की गाड़ी पकड़ी गई
खाद्य विभाग की चुप्पी से बढ़ रहा संदेह
Chhattisgarh Food Department Ration Investigation : गोबरा नवापारा में गरीबों के लिए मिलने वाले सरकारी चावल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां दो अलग-अलग मामलों में चावल से भरी गाड़ियां पकड़ी गई हैं। एक गाड़ी उचित मूल्य दुकान से और दूसरी रास्ते में बिचौलियों के कब्जे से पकड़ी गई।
इन मामलों में कार्रवाई और चावल की सुपुर्दगी को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध जताया है। प्रशासन की इस चुप्पी से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
वार्ड क्रमांक दो स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान से एक गाड़ी चावल लेकर जा रही थी। कांग्रेस पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने सतर्कता दिखाते हुए इस गाड़ी को पकड़ लिया। इसके बाद इसकी सूचना तुरंत खाद्य विभाग को दी गई।
पुलिस मौके पर पहुंची और गाड़ी को थाने ले आई। इस कार्रवाई के बाद से इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि दुकान से चावल बाहर कैसे जा रहा था। दूसरा मामला रास्ते में बिचौलियों के कब्जे से चावल पकड़े जाने का है। इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों मामले अलग-अलग स्थानों से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद किसी भी मामले में स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। खाद्य अधिकारी श्रद्धा चौहान से जब इस बारे में बात की गई। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
इन दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद अंचल की सभी राशन दुकानों की जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि सभी दुकानों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। आवंटन और वितरण रजिस्टर की वास्तविक स्टॉक से मिलान की जरूरत है। इससे यह साफ हो सकेगा कि गरीबों के राशन का दुरुपयोग हो रहा है या नहीं। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
दोनों मामलों में चावल की मात्रा और सुपुर्दगी का आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। इससे किसी भी तरह का भ्रम नहीं फैलेगा। विभाग को दोनों प्रकरणों की जानकारी अलग-अलग देनी चाहिए।
जनता चाहती है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। पारदर्शिता रहने से ही इस तरह के मामलों पर रोक लग सकती है। प्रशासन को इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द ही स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।