कांकेर दशहरा उत्सव: देवी-देवताओं के साथ राजमहल पहुंचे हैं ग्रामीण, अंगादेव देते हैं आशीर्वाद, जानें मान्यता

Kanker Dussehra Festival 2026: दो शताब्दियों से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा को लेकर हर साल लोगों में खास उत्साह रहता है।
Kanker Dussehra Festival 2026,
राजमहल(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights

  • राजमहल में दिखेगा 200 साल पुरानी परंपरा का वैभव।

  • दशहरा की तैयारियां शुरू, देश विदेश से पहुंचते है लोग।

  • रियासत काल से चली आ रही परंपरा।

  • एक माह पहले से ही शुरू हो गई तैयारी।

Chhattisgarh Dussehra Festival 2026: 200 साल से चली आ रही रियासत कालीन परंपरा दशहरा पर्व की तैयारियां शुरू हो गई है। कांकेर का ऐतिहासिक दशहरा उत्सव अपनी विशिष्ट परंपराओं और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। दो शताब्दियों से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा को लेकर हर साल लोगों में खास उत्साह रहता है। दशहरा के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित राजमहल में होने वाले आयोजन में राजपरिवार, ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल होंगे, इसकी तैयारी एक माह पहले से ही शुरू हो गई है।

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अंगादेव राजमहल आकर देते हैं आशीर्वाद

इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण राजपरिवार द्वारा अंगादेव की विशेष पूजा-अर्चना होती है। इसके साथ ही आसपास के गांवों से ग्रामीण अपने-अपने देवी-देवताओं के साथ राजमहल पहुंचते हैं। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने से राजमहल परिसर में भक्तिमय माहौल बनता है।

नौ दिन ही रह गया शेष

इतनी बड़ी भीड़ को सम्हालने के लिए राजपरिवार द्वारा विशेष सुरक्षा के इंतजाम किए गए है। वही विदेशी अतिथियों के लिए राजपरिवार द्वारा राजमहल परिसर में ही रुकने की विशेष व्यवस्था की गई है। सुरक्षा की दृष्टि से आम दिनों की तुलना पांच गुना अधिक सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात कर दिए गए है।

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पारंपरिक नृत्य से सजेगा उत्सव

इस दौरान आदिवासी नर्तक दलों के पारंपरिक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों की प्रस्तुति उत्सव के माहौल को और खास बनाती है। इन प्रस्तुतियों में आदिवासी समाज की जीवनशैली, सामूहिकता और अपनी परंपराओं के प्रति गहरा जुड़ाव दिखाई देता है। राजमहल में उपस्थित असित दुबे ने बताया कि इस वर्ष भी दशहरा की तैयारियां शुरू हो गई है राजमहल में रंगरोगन लिपाई पुताई साफ सफाई शुरू हो गई है। वर्षों से चली आ रही परंपरा को रीति रिवाज के साथ मनाए जाने और उसे बरकरार रखने तेरी जोरो पर है।

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