

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जल जीवन मिशन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्ष 2020 में 1.51 लाख परिवारों को पानी देने का लक्ष्य तय हुआ था।
1,000 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी 34 हजार घरों में पानी नहीं पहुंचा।
विभागीय आंकड़ों से योजना के काम पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन ने अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से रिपोर्ट तलब की है।
Chhattisgarh Drinking Water Supply Crisis : कांकेर जिले में पेयजल की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां ग्रामीणों तक नल से पानी पहुंचाने की योजना अधर में है। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। इसके बाद भी हजारों ग्रामीण परिवार नल जल के लिए तरस रहे हैं।
वर्ष 2020 में इस बड़ी योजना की शुरुआत जिले में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य हर घर तक साफ पानी पहुंचाना था। प्रशासन ने जिले के 1 लाख 51 हजार 157 परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य बनाया था। इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं कराई गईं।
योजना शुरू हुए करीब छह साल का समय बीत चुका है। इसके बावजूद वर्ष 2026 तक लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। जिले के लगभग 34 हजार 846 घरों तक आज भी पानी नहीं पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों में पानी की बड़ी-बड़ी टंकियां बनाई गई हैं।
गांवों की गलियों में नई पाइपलाइन भी बिछाई गई है। लेकिन पाइपलाइन बिछाने के बाद भी नलों में पानी नहीं आ रहा। अधूरे निर्माण के कारण लोगों को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल पा रही। स्थानीय लोग अब योजना के वास्तविक लाभ पर सवाल उठा रहे हैं।
बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली। गर्मी के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। महिलाएं दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस नेता राम कश्यप ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया। उन्होंने विभागीय आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रशासन को घेरा है। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया है।
कांकेर कलेक्टर ने इस मामले का तुरंत कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग को 15 दिनों के भीतर पूरी कार्ययोजना पेश करनी होगी। अधिकारियों से हर घर पानी पहुंचाने का अपडेट मांगा गया है।
स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पंचायतों की भूमिका और निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता पर सवाल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित गांवों में जांच टीम भेजी जाए।
योजना से जुड़े सभी तकनीकी दस्तावेजों की समीक्षा की मांग उठी है। स्वीकृति पत्र, कार्यादेश और भुगतान विवरण का मिलान होना चाहिए। काम की भौतिक स्थिति और पूर्णता प्रमाण-पत्रों को जांचना जरूरी है।
यदि जांच में किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो कार्रवाई हो। फर्जी दस्तावेज या सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त कदम उठाने की मांग है। दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना बेहद आवश्यक है। प्रभावित गांवों में तुरंत नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जानी चाहिए। इसके लिए प्रशासन को समयबद्ध तरीके से ठोस योजना बनानी होगी।
"जल जीवन मिशन के तहत एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी 34 हजार से अधिक परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। योजनाओं के निर्माण और भुगतान विवरणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।" — राम कश्यप, कांग्रेस नेता